‘ढाबे की रौनक लौट आई’ इस बार ज्यादा राख लाई। जी हां, तय मानकों से ज्यादा एमएसजी पाए जाने के कारण नेस्ले कंपनी की मैगी नूडल्स पर पिछले दिनों कई महीनों तक प्रतिबंध लगा रहा। प्रतिबंध खत्म हुआ तो मैगी बड़े जोर-शोर से बाजार में कूदी, लेकिन अब मैगी में राख की मात्रा तय मानकों से ज्यादा पाई गई है। एफएसडीए द्वारा चार महीने पहले अलग-अलग तीन दुकानों से भरे गए ये नमूने जांच में फेल हो गए हैं।

इससे पहले भी गोल्डी और आईटीसी के नूडल्स मानक के विपरीत पाए गए थे। मशहूर ब्रांड के नूडल्स फेल होने के बाद हड़कंप मच गया है। नमूनों की जांच रिपोर्ट आने के बाद एफएसडीए ने दुकानदारों को नोटिस थमा दिया है।

एफएसडीए की टीम ने सितंबर 2015 में अभियान चलाकर अलग-अलग कस्बों में दुकानों से नेस्ले कंपनी के मैगी नूडल्स के नमूने भरे थे। उत्तर प्रदेश के रायबरेली शहर में भी एक दुकान से मैगी का नमूना भरा गया था। जांच में तीनों नमूनों के नूडल्स में राख की मात्रा तय मानक एक प्रतिशत से अधिक पाई गई है। एफएसडीए ने दुकानदारों व कंपनियों पर मुकदमे की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

एफएसडीए के अधिकारी शशांक त्रिपाठी का कहना है कि मैगी में राख की मात्रा एक प्रतिशत से अधिक पाई गई है। हालांकि कितनी अधिक है यह रिपोर्ट में नहीं लिखा है। यह मात्रा एक प्रतिशत से कम होनी चाहिए। मुकदमे की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।