सांकेतिक तस्वीर

उत्तराखंड की अस्थायी राजधानी देहरादून के लक्खीबाग में शनिवार को श्मशान घाट में संवासिनी रेखा के अंतिम संस्कार के दौरान तस्वीर एक दिन पहले हुई संवासिनी की मौत से जुदा थी। रेखा का अंतिम संस्कार पूरे सम्मान के साथ किया गया।

उसके पार्थिव शरीर पर फूल-माला भी रखी गई थीं। कई चादरें डाली गई थीं। अंतिम संस्कार के लिए सामग्री, घी और दूसरे सामान आदि की व्यवस्था भी की गई थी। प्रशासनिक अधिकारियों ने आगे आकर उसकी चिता में लकड़ी लगाने का काम किया।

एक दिन पहले संवासिनी शिवानी गुप्ता के अंतिम संस्कार के लिए नारी निकेतन से केवल दो कर्मचारी आए थे। उनके पास न तो संवासिनी का मृत्यु प्रमाण पत्र था और न अंतिम क्रिया के लिए पैसे।

एक बार तो पंडित ने अंतिम संस्कार कराने से इनकार कर दिया था, लेकिन बाद में किसी तरह अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम संस्कार की सामग्री आदि को श्मशान घाट समिति ने मदद की थी। इस मामले को मीडिया ने प्रमुखता से उठाया था। शनिवार को संवासिनी रेखा के अंतिम संस्कार के लिए प्रशासन ने गंभीरता दिखाई।

अपर जिलाधिकारी प्रशासन प्रताप सिंह शाह और तहसीलदार सदर गुरुदीप सिंह ने श्मशान घाट आकर अंतिम संस्कार की पूरी प्रक्रिया में हिस्सा लिया। पंडित अनिल शर्मा ने धार्मिक रीति-रिवाज से संवासिनी रेखा की अंतिम क्रिया पूरी कराई। इस दौरान समाज कल्याण विभाग और नारी निकेतन कर्मचारियों के अलावा काफी लोग मौजूद थे।