एक बार फिर साल का वही समय आ गया है जब हम अपने जीवन को नई ऊर्जा और नई उम्मीदों से भरने का संकल्प लेते हैं। नया साल यानी जीवन में नए सपनों को जगह देने का अवसर, खुद से खुद को बेहतरी की और ले जाने का वादा।

रोजमर्रा की भागदौड़ में अक्सर इतना समय ही नहीं मिलता कि हम कारणों की पहचान कर सकें जो हमें असफलता की ओर ले जाती हैं। अपने संबंधों, संसाधनों और सेहत को सकारात्मक ऊर्जा से भरने की शुरुआत घर से ही करने से बेहतर क्या हो सकता है। सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण घर यानी परिवार के सदस्यों के बीच अच्छी बातचीत, प्यार, काम में बरकत और रचनात्मकताएं कम झगड़े और झंझट।

वास्तु शास्त्र के अनुसार पांच तत्व, सूरज, चांद, नव ग्रह और पृथ्वी इनकी ऊर्जा का संतुलन ही जीवन संचालित करता है। घर में इसी ऊर्जा का संतुलन स्थापित कर हम जीवन को बेहतरी की ओर ले जा सकते हैं। यहां दिए जा रहे हैं वास्तु से जुड़े ऐसे ही कुछ उपाय जो आपकी मदद कर सकते हैं…

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  • घर के मुख्य द्वार से ही सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जाओं के प्रवेश का आदान-प्रदान शुरू होता है। अतः वहीं से हम शुरू करते हैं अपने घर को सकारात्मक ऊर्जा देने का उद्यम करते हैं, तो नववर्ष में घर के द्वार पर चांदी के बने स्वास्तिक को स्थान देकर घर में सकारात्मकता उत्पन्न करें।
  • सर्प्रथम तो धन के देवता कुबेर का गृह उत्तर दिशा में है इस वर्ष उत्तर दिशा को सशक्त बनाएं। खाते में असंतुलन या धोखाधड़ी अप्रासंगिक वार्तालाप, विदेश यात्रा में देरी या जाना रदद् होना, उच्च शिक्षा में असफलता, मुंहासे या चकत्तों से रूप रंग में गिरावट और कानून संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हों तो वास्तु द्वारा उत्तर दिशा को सशक्त बनाएं। उत्तर दिशा में कुबेर देवता को स्थान देकर अपनी बुद्धिमता व समझ को संतुलित व सक्षम करें।
  • .घर में पेड़-पौंधे लगाने से ही सकारात्मक ऊर्जा को स्थान मिलता है। यह पूर्व दिशा के दोषों को हटाकर संतुलन बनाने का कार्य करते हैं।
  • घर के उत्तर-पूर्व से कूड़ा-करकट को फेंककर पुराने गले-सढ़े कपडे व वस्तुओं को हटाएं। छह महीने या अधिक समय से रखे बेकार व बिना इस्तेमाल किए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को, जो विकास में रुकावट या अर्चन डालें उन्हें भी घर से बाहर निकालकर या फेंक कर कलह-क्लेश से दूर रहें। सकारात्मक शक्ति की ऊर्जा को घर व परिवार में स्थान दें।
  • लोहे की छड़ आदि समान को भी छत पर न रखकर घर में खुशहाली का वातावरण स्थापित करें।
  • घर में ऐसे चित्र जो वीरान घर, लड़ाई-झगडे पतझड़ आदि नकारात्मक चीजों को इंगित करते हैं, उनके स्थान पर वहां मन को उत्साह, आनंद, उमंग, शांति व तरोताजगी की सकारात्मक ऊर्जा वाले चित्रों को पूर्व दिशा में लगाएं।
  • अध्यन करते हुए पीठ खिड़की की और नहीं होनी चाहिए बल्कि दीवार होनी चाहिए जो निरन्तरता की प्रतीक है।
  • जल तत्व संबंधी चित्रों को सोने के कमरें में न लगाएं।vaastu_tortoise
  • घर में मंदिर न बनाएं यदि बनाएं तो छोटा सा पूजा स्थल होना चाहिए, लेकिन उसमें मूर्ति नहीं होनी चाहिए।
  • पूजा स्थल में मृतक की फोटो न लगाएं। पितरों की दिशा दक्षिण-पश्चिम दीवार होती है।
  • दक्षिण-पश्चिम में शीशा नहीं लगाना चाहिए। इससे बनते काम अंतिम दौर में पूर्ण नहीं होते।
  • घर की दक्षिण दिशा में जलतत्व या नीला रंग नहीं होना चाहिए। यदि ऐसा करना अति आवश्यक हो तो हरे और लाल रंग का मिश्रण या केवल लाल रंग का ही प्रयोग करना चाहिए।
  • दक्षिण दिशा मंगल ग्रह की होती है, इसे दक्षिण दिशा का सेनापति कहा जाता है। मंगल ग्रह दक्षिण दिशा का स्वामी है अतः इसमें किसी प्रकार के दोष से क़ानूनी कठिनाइयां उत्पन्न हो सकती हैं।
  • दक्षिण दिशा के रसोई घर में सफ़ेद रंग का रोगन वास्तु दोष को दूर कर देता है।
  • घर के दक्षिण में यदि खुलापन है तो उसे दूर करने के लिए कृष्ण की मुरली बजाती मूर्ति को रख कर दूर किया जा सकता है।
  • घर के दक्षिण व पश्चिम में पानी का बहाव, पानी का फुव्वारा बचत में बाधक हो सकता है।
  • नव वर्ष में जमीन खरीदते समय उसकी निकटवर्ती सड़कें और ढलान का खास ध्यान रखना जरूरी है। वे प्लॉट न लें जिस पर दक्षिण-पश्चिम से सड़क आ रही हो। दक्षिण-दिशा को सड़क वाले प्लॉट को नहीं खरीदना चाहिए। दक्षिण-पश्चिम दिशा को कटता प्लॉट भी नहीं खरीदना चाहिए।
  • पानी की टंकी, बोरिंग, रसोई घर में पौंधे, बालकनी, भण्डारण, खुली जगह ढलान, रंग और सज्जा का वास्तु निरूपण जरूरी है।
  • जिस ईमारत के दक्षिण-पूर्व में भूमिगत पानी की टंकी होती है उसको बाद में बेचने में मुश्किल हो जाती है।
  • यदि प्लॉट व्यापारिक प्रयोग के लिए खरीद रहे हैं तो हमें ध्यान रखना चाहिए कि वे किस उद्देश्य के लिए खरीद रहे हैं। महावस्तु कर कहते है कि जिस प्लाट में दक्षिण-पश्चिम दिशा में कट हो वह प्रॉपर्टी-डीलिंग के उपयुक्त नहीं है।
  • अगर तैयार फ्लैट, बंगला, दुकान या शोरूम खरीद रहे हों तो उनका मुख्य द्वार, कमरों के स्थान निर्धारण और पंचतत्वों के संतुलन को वास्तु के अनुसार ध्यान में रखना चाहिए।
  • नववर्ष में अपने लक्ष्य को स्वयं अपने हाथों से कागज पर लिखकर अपने घर के काम के मेज पर या सामने दीवार पर टांग लें साथ ही निश्चित समय-सीमा भी बांध लें तो कोई ऐसी शक्ति नहीं जो आपके लक्ष्य को पूरा न होने दे।
  • इसलिए ‘बीती ताई बिसार दे आगे की सुध ले’ इस वर्ष में जो कुछ अच्छा या बुरा हुआ यदि मानव उसको एक बार को भूलकर अपने आगे आने वाले समय के लिए सोचे, अपने लक्ष्य को यदि कोई रूप देना चाहे तो वे अपने आसपास अपने घर के वास्तु दोषों में फेर बदल करे, तो निश्चय ही सफलता के कगार को पार कर लेंगे। इस नए वर्ष को नई सकारात्मक शक्ति से ओत-प्रोत करने में अब देर किस बात की।

यह लेख मशहूर ज्योतिष, वास्तु और फेंग्शुई विशेषज्ञ नरेश सिंगल से बातचीत के आधार पर लिखा गया है। वास्तु से जुड़ी किसी भी तरह की समस्या के समाधान के लिए नरेश सिंगल से संपर्क करें…

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