रेप आर गर्भपात के बाद हुई तमाम गिरफ्तारियों और संदिग्ध परिस्थितियों में हुई एक संवासिनी की मौत की बदनामी के बाद भी नारी निकेतन का तंत्र कोई सबक लेता नहीं दिख रहा है। शनिवार को संवासिनी शिवानी गुप्ता के अंतिम संस्कार में भी वह लापरवाह बना रहा। शव के साथ केवल कागज का टुकड़ा लेकर पहुंचे कर्मचारियों को पहले तो पंडित ने क्रिया कर्म कराने से मना कर दिया। जैसे-तैसे पंडित तैयार हुए तो कर्मचारी बजट नहीं होने का रोना रोने लगे।

श्मशान घाट समिति ने इंसानियत दिखाते हुए कुछ सामान और सामग्री उपलब्ध कराई तब जाकर संवासिनी का अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान समाज कल्याण और प्रशासन का एक भी जिम्ममेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा।

पोस्टमार्टम के बाद संवासिनी शिवानी गुप्ता के पार्थिव शरीर को लक्खीबाग स्थित श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार के लिए लाया गया। एंबुलेंस में शव लेकर आए दो कर्मचारी न तो संवासिनी के मृत्यु का प्रमाण पत्र और न ही किसी तरह का सरकारी दस्तावेज लेकर आए थे। सिर्फ सफेद कागज के टुकड़े पर संवासिनी की मौत का उल्लेख किया गया था।

श्मशान घाट के पंडित अनिल शर्मा ने डेथ सर्टिफिकेट अथवा नारी निकेतन के दस्तावेज के बिना अंतिम संस्कार कराने से इनकार कर दिया। इस वजह से करीब बीस मिनट तक ऊहापोह की स्थिति रही। इसी बीच शव लेकर आए एंबुलेंस के ड्राइवर ने पंडित से बातचीत की। परिचित होने के कारण ड्राइवर ने पूरी जिम्मेदारी ली तो पंडित ने अंतिम संस्कार पर हामी भरी।

इसके बाद अंतिम संस्कार के खर्च की बात आई तो कर्मचारी सरकारी स्तर पर धन नहीं मिलने का रोना-रोने लगे। उन्होंने कहा कि उन्हें ही मिल-जुलकर रकम खर्च करनी है। इसके बाद श्मशान घाट समिति ने कुछ सामग्री और सामान अपनी तरफ से दिया। इसके बाद धार्मिक रीति रिवाज से संवासिनी का अंतिम संस्कार किया गया। नारी निकेतन के कर्मचारियों से सिर्फ 1500 रुपये लिया गया।

संवासिनी शिवानी गुप्ता साल 2007 में कोतवाली क्षेत्र में लावारिस अवस्था में मिली थी। मानसिक रूप से बीमार होने की वजह से वह अपने बारे में कुछ नहीं बता पाई थी। सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश पर उसे नारी निकेतन भेज दिया गया था। इलाज के लिए संवासिनी को बरेली भी भेजा गया था।