संसद के शीतकालीन सत्र के आखिरी दिन बुधवार को लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने ही उनके विरोध में नारे लगा रहे एक कांग्रेस एमपी को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने रोक दिया। सोनिया ने अपनी पार्टी के सांसदों से आग्रह किया कि वे पीएम मोदी के खिलाफ नारेबाजी न करें।

सोनिया ने उनसे कहा कि उन्‍हें भ्रष्‍टाचार के खिलाफ नारेबाजी करनी चाहिए, प्रधानमंत्री का नाम नहीं लेना चाहिए। सोनिया के आग्रह के बाद प्रधानमंत्री मोदी जब तक सदन में रहे उनके खिलाफ नारेबाजी नहीं हुई। दोपहर में वे दो दिन की रूस यात्रा के लिए रवाना हो गए।

शीतकालीन सत्र के आखिरी दिन कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी वेल में जाकर पीएम मोदी के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। वहीं पर सोनिया गांधी अपोजिशन के लिए रिजर्व सीटों की पहली लाइन में बैठी हुईं थीं।

सोनिया ने चौधरी को पास बुलाया और उनसे कहा कि वे करप्शन के खिलाफ नारेबाजी जरूर करें, लेकिन पीएम का नाम न लें। इसके बाद जितनी देर तक पीएम लोकसभा में मौजूद रहे, उतनी देर तक, उनका नाम लेकर कोई नारेबाजी नहीं हुई। बाद में पीएम दो दिन की रूस दौरे पर रवाना हो गए।

पीएम मोदी और सोनिया गांधी दोनों लोकसभा के सदस्‍य में हैं। लोकसभा में जहां बीजेपी नीत एनडीए के सांसदों की संख्‍या अच्‍छी खासी है, वहीं कांग्रेस के केवल 45 सांसद हैं।

शीतकालीन सत्र में इनका ज्‍यादातर समय पीएम और उनकी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने में गुजरा है। संख्‍या बल की इस कमी के कारण लोकसभा विरोध प्रदर्शन के बावजूद काम करती रही, लेकिन हंगामे और प्रदर्शन से राज्‍यसभा की कार्यवाही काफी बाधित हुई। उच्‍च सदन में जहां मुख्‍य विपक्षी पार्टी की अच्‍छी खासी संख्‍या है जबकि सरकार अल्‍पमत में है।

एक महीने के लंबे संसद सत्र में राज्यसभा में केवल 57 घंटे की काम हो पाया, जबकि 55 हंगामे की भेट चढ़ गए। वहीं दूसरी तरफ लोकसभा ने 11 बिल पास किए, जबकि राज्‍यसभा में पास किए जाने वाले बिलों की संख्‍या केवल तीन रही।