देहरादून।… एक निजी डॉक्टर से मारपीट के आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर राज्यभर में गुरुवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर गए सभी निजी डॉक्टर उत्तराखंड हाईकोर्ट के सख्त आदेशों के बाद काम पर लौट आए हैं।

नैनीताल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के.एम. जोजेफ तथा जस्टिस वी.के. बिष्ट की पीठ ने बुधवार को एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए निजी डॉक्टरों को तत्काल काम पर लौटने के सख्त निर्देश दिए।

उत्तराखंड यूथ बार एसोसिएशन ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की थी। याचिका में कहा गया है कि यह कार्य आवश्यक सेवा नियमावली के तहत आता है। हड़ताल के कारण मरीजों की जान पर बन आई है। कोर्ट ने सरकार को इस मामले में चार जनवरी तक अपना पक्ष रखने का आदेश दिया है।

उत्तराखंड आईएमए के महासचिव डा. चन्द्र शेखर जोशी ने बताया कि फिलहाल कोर्ट के आदेशों के कारण हड़ताल स्थगित कर दी गई है, लेकिन आरोपियों की गिरफ्तारी तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

उल्लेखनीय है कि निजी डॉक्टरों से मारपीट के आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर राज्य में सभी निजी अस्पतालों के बंद के कारण मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

राज्य में नैनीताल जिले के अंर्तगत हल्द्वानी स्थित 350 बिस्तरों वाले सेंट्रल अस्पताल के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रमोद जोशी व अस्पताल के निदेशक संजय शर्मा से चार दिन पूर्व 65 वर्षीय एक मरीज की पेसमेकर लगाने के बाद मृत्यु होने से नाराज परिजनों ने मारपीट की थी।