उत्तराखंड सरकार को अब किसानों की याद आने लगी है। मौजूदा कांग्रेस सरकार के लगभग चार साल पूरे हो चुके हैं और अब कृषि विकास के लिए अहम कदम उठाए जा रहे है। पर्वतीय क्षेत्रों में स्थानीय कृषि फसलों के उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके लिए किसानों को विभिन्न योजनाओं के तहत मदद की जा रही है। इसके साथ ही फसलों के समर्थन मूल्य घोषित करके किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने की भी कोशिश हो रही है।

मुख्यमंत्री हरीश रावत की घोषणाओं के हिसाब से पर्वतीय क्षेत्रों में मंडुआ, रामदाना एवं उगल-फाफर फसलों को प्रोत्साहित करने की योजना शुरू कर दी गई है। पर्वतीय क्षेत्रों में स्थानीय एवं परंपरागत फसलों के अंतर्गत मंडुआ के कुल बोए गए क्षेत्रफल के 25 फीसदी भाग में उत्पादन पर 200 रुपये प्रति क्वैंटल, उगल-फाफर के कुल उत्पादन पर 200 रुपये प्रति क्वैंटल प्रोत्साहन राशि तथा रामदाना के कुल विपणन पर 200 रुपये प्रति क्वैंटल प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।

पर्वतीय क्षेत्रो में स्थानीय फसलों के बीजों पर 75 फीसदी अनुदान की भी योजना तैयार की गई है। पर्वतीय क्षेत्रों के स्थानीय एवं परंपरागत फसलों के बीजों की कमी को पूरा करने के लिए स्थानीय एवं परंपरागत फसलों के सत्यापित बीज टीडीसी एवं कृषि विभाग के माध्यम से स्थानीय स्तर से तैयार कर किसानों को 75 फीसदी के अनुदान पर उपलब्ध कराए जाएंगे।

आपदाग्रस्त क्षेत्रों में कृषि उत्पादों के विपणन पर 10 फीसदी बोनस देने की भी राज्य सरकार की योजना है। राज्य के 5 आपदाग्रस्त जिलों उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ में स्थानीय और परंपरागत फसलों के विपणन पर 10 फीसदी बोनस एफआईजी अथवा स्वयं सहायता समूह के माध्यम से दिया जाएगा। स्थानीय फसल उत्पादों की बिक्री मार्केटिंग बोर्ड के जरिये की जा रही है।

इसके अलावा राज्य सरकार ने पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि यंत्रों पर 80 और 90 फीसदी अनुदान की योजना को भी लागू की है। पर्वतीय क्षेत्रों से लगातार हो रहे पलायन, महिलाओं की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए और जुताई के लिए बैलों की कमी को देखते हुए सरकार ने कृषि यंत्रीकरण को प्रोत्साहित किया है। इसके अंतर्गत पर्वतीय क्षेत्रों के आपदाग्रस्त 5 जिलों में 90 फीसदी और बाकी जिलों में 80 फीसदी अनुदान पर कृषि यंत्रों का वितरण किया जा रहा है।

इसमें जुताई के लिए पावर टिलर एवं पावर वीडर किसानों द्वारा खरीदे जा रहे हैं। इतना ही नहीं किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए ‘सरकार किसान के द्वार’ के संकल्प को साकार करने के लिए रबी और खरीफ महोत्सवों का भी आयोजन किया जा रहा है। जिसमें किसानों, जनप्रतिनिधियों, विभागीय अधिकारियों और वैज्ञानिकों द्वारा शामिल होकर किसानों की समस्याओं का मौके पर ही समाधान भी बताया जा रहा है।

किसानों को उच्च तकनीक एवं देय सुविधाओं की जानकारी भी दी जा रही है। पिछले तीन साल में कुल 325656 किसानों ने भाग लिया है और 824.29 लाख के कृषि निवेशों का वितरण हुआ है। मैदानी क्षेत्रों में कृषि यंत्र 50 फीसदी अनुदान पर वितरित किए जा रहे हैं, जिसमें रोटावेटर, जीरो ट्रिल, सीड ड्रिल, कृषि रक्षा यंत्र, पावर वीडर, पावर टिलर, वाटर लिफ्टिंग पम्प जैसे कई यंत्रों का वितरण किया जा रहा है।

फसलों की उत्पादकता बढ़ोतरी में लेजर लैंड-लैवलर का उपयोग बहुत ही महत्वपूर्ण साबित हुआ है।