उत्तराखंड के एक और लाल ने मंगलवार को अपनी जान पर खेलकर हजारों लोगों की जिंदगियां बचा लीं। घटना उस वक्त की है, जब दिल्ली में बीएसएफ का जहाज आबादी क्षेत्र के ऊपर ही क्रैश हो गया, लेकिन पायलट की सूझबूझ ने प्लेन को आबादी क्षेत्र के ऊपर गिरने से बचा लिया।

अपनी जान पर खेलकर क्रैश विमान को घनी आबादी में गिरने से बचाने वाले बीएसएफ के पायलट भगवती प्रसाद के परिजन सदमे में हैं। मूलरूप से उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में कोटमां गांव निवासी दिवंगत पायलट भगवती प्रसाद के घर में मातम पसरा हैं। न गांव वालों को उनकी मौत की खबर पर यकीन हो रहा है और न ही देहरादून में रहने वाली उनकी भाभी को इस खबर में कोई सच्चाई लग रही है।

उन्हें यकीन ही नहीं हो पा रहा है कि आज उनका भगवती उनके बीच नहीं रहा। भगवती अपने परिवार के साथ दिल्ली में रहते थे, लेकिन देहरादून से भगवती का गहरा नाता रहा है। यहीं रहकर भगवती ने पायलट बनने के सपने बुने और दिन-रात पढ़ाई कर अपने ख्वाब पूरे किए।

देहरादून में रहने वाली उनकी भाभी और उनके भतीजों को यकीन ही नहीं हो रहा है कि आज भगवती उनके बीच नहीं है। गांव से अपनी बारहवीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद कॉलेज की पढ़ाई भगवती ने देहरादून में अपने भाई के पास रहकर पूरी की थी।

शुरुआत से ही उनकी आदत किसी को तकलीफ न देने की थी और अंत तक भी वे अपनी इसी आदत को बनाए रखे। अपनी जान जोखिम में डालकर भगवती ने हजारों लोगों की जान बचाई और प्लेन को आबादी क्षेत्र में गिरने से बचाया। दुर्घटना में अपनी जान गंवाकर हजारों लोंगो की जान बचाने वाले भगवती के घर आज मातम है। भगवती अपने पीछे पत्नी और दो बच्चे छोड़ गए हैं।