नई दिल्ली।… नेपाल ने सोमवार को भारत को बताया कि संविधान को लेकर आंदोलनरत मधेसियों के राजनीतिक दलों की मांगों को हल करने के लिए कुछ महत्वपूर्ण फैसले किए गए हैं, जिसका नई दिल्ली में सरकार ने स्वागत किया।

एक बयान में विदेश मंत्रालय ने कहा कि बतौर पड़ोसी एवं शुभेच्छु भारत को नेपाल में संविधान को लेकर आतंरिक मतभेद से उत्पन्न अशांति को लेकर गहरी चिंता थी।

उसने नेपाली राजनीतिक दलों से परस्पर सहमत समय सीमा के अंदर सकारात्मक वार्ता के जरिए संवैधानिक मुद्दों का हल ढूंढ़ने में जरूरी परिपक्वता एवं लचीलापन दिखाने की अपील भी की थी।

विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘विदेश मंत्री को नेपाल के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री कमल थापा ने सोमवार को बताया कि नेपाली मंत्रिमंडल ने संविधान के संबंध में आंदोलनरत मधेसी दलों की मांगों के समाधान के लिए कुछ महत्वपूर्ण फैसले किए हैं।’

मंत्रालय ने कहा कि फैसलों में आनुपातिक समावेशन के आधार पर सरकारी संस्थाओं में भागीदारी तथा जनसंख्या के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन पर संविधान में संशोधन शामिल हैं। प्रांतों के सीमांकन का मुद्दा भी राजनीतिक आम सहमति के आधार पर संविधान में उपयुक्त व्यवस्था के जरिए हल किया जाएगा। इसी तरह, नागरिकता सहित दूसरी मांगें भी वार्ता और आम सहमति के माध्यम से हल की जाएंगी।

विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘भारत सरकार इन घटनाक्रम का सकारात्मक कदम के रूप में स्वागत करती है, जो नेपाल के वर्तमान गतिरोध को दूर करने के वास्ते बुनियाद तैयार करने में मदद करते हैं। बतौर पड़ोसी और शुभेच्छु भारत को नेपाल में संविधान को लेकर आतंरिक मतभेद से उत्पन्न अशांति को लेकर गहरी चिंता थी।।’

मंत्रालय ने कहा, ‘हम सभी नेपाली राजनीतिक दलों से परस्पर सहमत समय सीमा के अंदर सकारात्मक वार्ता के जरिए संवैधानिक मुद्दों का संतोषजनक हल ढूढने में जरूरी परिपक्वता एवं लचीलापन दिखाने की अपील करते हैं।’

बयान में कहा गया, ‘हमें विश्वास है कि नेपाल में स्थिति सामान्य होने से दोनों देशों के बीच निर्बाध वाणिज्य के लिए अधिक सुरक्षित एवं प्रत्याशित माहौल तैयार होगा।’