सांकेतिक तस्वीर

उत्तरकाशी में शिक्षा विभाग की लापरवाही और कुप्रबंधन से जूझ रहे राजीव गांधी आवासीय विद्यालय चिन्यालीसौड के 100 से ज्यादा छात्र-छात्राओं को रविवार सुबह भूखे पेट रहना पड़ा।

बच्चों को न सुबह की चाय मिली और न नाश्ता। कारण, कैंटीन संचालक के खाना बनाने से हाथ खड़े कर दिए। भूखे-प्यासे बच्चों को बडी मुश्किलों से दोपहर बाद भोजन मिला तो नौनिहालों ने राहत की सांस ली।

विद्यालय में कैंटीन संचालक को जुलाई महीने से विभाग ने पैसे नहीं दिए हैं। बताया जाता है कि कैंटीन संचालक का करीब बारह लाख के आसपास का हिसाब बैठता है। कैंटीन संचालक का कहना था कि करीब नौ लाख रुपया उधार दुकानदार का हो गया। लिहाजा अब दुकानदार भी राशन देने से हाथ खड़े कर रहे हैं।

बच्चों के भूखे पेट रहने की खबर मीडिया में आने के बाद शिक्षा विभाग व प्रशासन हरकत में आए। आनन-फानन में विद्यालय पहुंचकर अधिकारियों ने कैंटीन संचालक व दुकानदारों से बातचीत कर 25 दिसंबर तक हर हाल में उन्हें उनका भुगतान कराने का आश्वासन दिया। इसके बाद ही कैंटीन संचालक खाना बनाने को तैयार हुआ।

खंड शिक्षा अधिकारी अनिल कुमार ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि विद्यालय प्रबंधन को बजट न मिलने के कारण यह समस्या पैदा हुई है। मीडिया में खबर आने के बाद कैबिनेट मंत्री प्रीतम पंवार ने विद्यालय में फील्टर की व्यवस्था की थी। यही नहीं इस विद्यालय में बच्चों के पास सोने, रहने व शौचालय की प्रर्याप्त व्यवस्था भी नहीं है।