नाटे कद के मानव (बामन) की उत्पत्ति भारत में हुई थी और यहीं से बामन मानव पूरी दुनियाभर में फैले। अभी तक माना जा रहा था कि बामन मानव अफ्रीका महाद्वीप से भारत आया था, लेकिन भारतीय मानव विज्ञान सर्वेक्षण को नर्मदा घाटी में डेढ़ लाख साल पुराने जो जीवाश्म मिले हैं उनकी जांच से यह राज खुल गया है।

पुराणों में बामन अवतार का जिक्र किया गया है, लेकिन जीवाश्मों की जांच से अब वैज्ञानिक आधार पर भी यह पुष्ट हो गया कि भारतीय बामन मानव दुनिया में फैली नाटे कद की मानव प्रजाति के पुरखे हैं।

भारतीय मानव विज्ञान सर्वेक्षण के विज्ञानियों को नर्मदा घाटी की गुफाओं के पास बामन मानव के कंधे की हड्डी (कॉलर बोन) और बाजू की अस्थियां मिली हैं। जांच में ये अस्थियां डेढ़ लाख साल पुरानी पाई गईं। डीएनए जांच के आधार पर इनकी लंबाई का चार फुट, छह इंच आकलन किया गया।

इन जीवाश्मों के डीएनए फिंगर प्रिंट का मिलान अंडमान में रहने वाले ओंगे लोगों से किया गया तो समानता पाई गई। अभी तक यह माना जाता था कि ओंगे अफ्रीका से भारत आए थे।

अफ्रीका में अभी तक जो बामन मानव के जीवाश्म मिले हैं, जांच में उनकी जीन 60 हजार साल पुरानी ही पाई गई। नर्मदा घाटी में डेढ़ लाख साल पुराने जीवाश्मों के मिलने के बाद विज्ञानियों ने साबित किया कि बामन मानव भारत से अफ्रीका गया। इसके साथ ही बामन मानव उत्पत्ति के इतिहास में एक नया अध्याय दर्ज हो गया।

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ये बामन मानव ऑस्ट्रिक प्रजाति के रहे हैं। उड़ीसा के पौड़ी भुइया की नस्ल भी इनसे मिलती-जुलती है। ओंगे के अलावा जारवाह, ग्रेट अंडमानी, मुंडा, ओरांव आदि नाटे कद के मानव इसी नस्ल के हैं। विज्ञानियों का मानना है कि 70 हजार साल पहले बामन मानव नर्मदा घाटी से निकल कर अन्य देशों में गए।

वरिष्ठ विज्ञानी, भारतीय मानव विज्ञान सर्वेक्षण डॉ. अनेक आर. सांख्यान कहते हैं, नर्मदा घाटी में बहुत गुफाएं हैं। इन्हीं में बामन मानव रहता था। यह पाषाण युग रहा है। अभी तक अफ्रीका को बामन मानव का उद्गम स्थल माना जाता था, लेकिन डेढ़ लाख पुराने जीवाश्मों के मिलने के बाद यह सिद्ध हो गया कि बामन मानव भारत से अफ्रीका गए। ये बामन मानव दुनिया भर की नाटे कद की मानव प्रजाति के पुरखे हैं।