उत्तराखंड की अस्थायी राजधानी देहरादून स्थित नारी निकेतन में संवासिनी से रेप और गर्भपात कराने के मामले में पुलिस ने शनिवार को भ्रूण के डीएनए मिलान के लिए चार लोगों के ब्लड सैंपल लिए हैं। इनमें तीन होमगार्ड और एक सफाई कर्मचारी शामिल है। वहीं, संवासिनी के शारीरिक शोषण के आरोप में जेल में बंद दोनों आरोपियों के डीएनए मिलान की रिपोर्ट अब तक नहीं मिल पायी है।

नारी निकेतन मामले में पुलिस अब तक पूर्व अधीक्षिका सहित आठ कर्मचारियों को जेल भेज चुकी है। इनमें केयर टेकर हाशिम और होमगार्ड ललित कुमार बिष्ट पर शारीरिक शोषण का आरोप है।

बरामद भ्रूण संवासिनी का होने की पुष्टि के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों के ब्लड सैंपल डीएनए मिलान के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला में भेज दिए थे। हालांकि अभी तक उसकी रिपोर्ट नहीं मिल पायी है। कोर्ट ने शुक्रवार को विवेचक कविता जोशी द्वारा तीन होमगार्ड और सफाई कर्मचारी का डीएनए मिलान कराने को दिया गया प्रार्थना पत्र को स्वीकार कर लिया था।

पुलिस ने शनिवार को चार संदिग्धों होमगार्ड कृष्णकांत, त्रिलोक, तिलक और सफाई कर्मचारी गुरुदास के ब्लड सैंपल लेकर लैब भेज दिए। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. सदानंद दाते ने कहा कि चारों संदिग्धों के डीएनए सैंपल ले लिए गए हैं। अभी तक पहली डीएनए रिपोर्ट नहीं मिल पायी है। प्रयास है कि विवेचना में किसी तरह की कमजोरी न रहने पाए।

नारी निकेतन में मूक बधिर संवासिनी से रेप के मामले में पुलिस ने 55 दिन के समय में नारी निकेतन आने वाले पुरुषों को चि‌ह्नित किया है। इस अवधि में तीन होमगार्ड और सफाई कर्मी नारी निकेतन में ड्यूटी पर रहे।

हालांकि, पीड़ित संवासिनी द्वारा साइन लैंग्वेज के माध्यम से दिए अपने बयान में केयर टेकर हाशिम और होमगार्ड ललित कुमार बिष्ट को शोषण के लिए आरोपित किया था। वो दोनों जेल में है। बताया जा रहा है कि संवासिनी का काफी समय सफाई कर्मचारी के साथ गुजरता था, क्योंकि पीड़िता सफाई में उसका हाथ बंटाती थी।