सौर ऊर्जा आपूर्ति की निरंतरता बनाए रखने के लिए विभिन्न देशों के बीच ‘केबल नेटवर्किंग’ के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आइडिया पर कर्क और मकर रेखा के बीच बसने वाले तकरीबन 120 देशों ने ‘सूर्य मित्र राष्ट्र’ संगठन बना लिया है। पेरिस महासम्मेलन में अंतिम मुहर लगने के बाद इस आइडिया को धरातल पर उतारने की दिशा में काम भी शुरू हो गया है।

पेरिस महासम्मेलन में कार्बन उत्सर्जन को रोकने के लिए जीवाश्म ईंधन के स्थान पर सौर ऊर्जा का विकल्प विश्व के देशों के समझ में तो आया था, लेकिन यह समझ नहीं पा रहे थे कि यह संभव कैसे होगा?

सूर्य किसी भी देश में औसत आठ-दस घंटे ही रहता है। फिर सौर ऊर्जा को स्टोर भी नहीं किया जा सकता है, ऐसी स्थिति में सौर ऊर्जा को कैसे विकल्प बनाया जाए। इस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केबल नेटवर्किंग का आइडिया दिया। यानी जब सूर्य एक देश में डूबता है तो दूसरे में निकलता है।

मतलब सूरज 24 घंटे में कहीं न कहीं तो रहता ही है। तो क्यों ना वहीं से अंधेरे में रहने वाले देश सौर ऊर्जा प्राप्त कर लें। जब कर्क और मकर रेखा के बीच के देश नेटवर्किंग कर लेंगे तो जिस देश में सूर्य रहेगा, वहां से विद्युत आपूर्ति होती रहेगी।

पेरिस महासम्मेलन में पीएम मोदी के प्रतिनिधिमंडल के सदस्य भारतीय वन अनुसंधान शिक्षा परिषद के वैज्ञानिक एफ डॉ. वीआरएस रावत ने बताया कि कर्क और मकर रेखा के बीच बसने वाले तकरीबन 120 देश इस आइडिया पर सहमत हुए और उन्होंने सूर्य मित्र राष्ट्र संगठन बना लिया।

डॉ. रावत ने बताया कि मित्र राष्ट्रों ने इस समझौते को पेरिस महासम्मेलन में पास भी कर दिया है। इसमें अमेरिका, ब्रिटेन, ब्राजील, चीन, मोरक्को, कीनिया, इंडोनेशिया, चिली आदि देश शामिल हैं।