साल 2015 की शुरुआत में एक दूर के तारे से प्रकाश के रूप में मिलते सिग्नल्स से एलियंस के अस्तित्व को लेकर एक बार फिर उम्मीद बंधी थी। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस विशाल ब्रह्मांड में मानव जैसे बुद्धिमान प्राणी अकेले नहीं हो सकते। आज नहीं तो कल एलियंस का पता चल ही जाएगा।

पिछले कुछ महीनों से एक तारे से घटती बढ़ती चमक नजर आ रही थी। उसकी चमक असमान्य रूप से कम थी, जबकि सामान्य रूप से तारों की रोशनी में इस तरह का परिवर्तन नहीं देखा जाता। जिसे देख वैज्ञानिकों को लगने लगा था कि संभवत: यह किसी परग्रही प्राणी द्वारा भेजे जा रहे सिग्नल हैं।

इस तारे का नाम केआइसी 8462852 है, जो पृथ्वी से 15 सौ प्रकाश वर्ष दूर स्थित है। इस तारे पर अंतरिक्ष में जीवन की तलाश को लेकर कार्य कर रही संस्था सर्च फॉर एक्सट्राटेस्ट्रीयल इंटेलीजेंसी सेटी ने खोजा था। यह संस्था पिछले सालों से इस खोजी अभियान में जुटी है।

तारे में अचानक असमान्य रोशनी मिली तो सेटी के वैज्ञानिकों में उम्मीद जगी कि हो न हो एलियंस कोई सिग्नल भेज रहे हैं। जिसमें एलियंस सभ्यता ने अपने तारे के चारों ओर डायसन स्फेर की काल्पनिक संरचना जैसे सोलर पैनल लगाएं हों और रोशनी में परिवर्तन आया हो।

इस संभावना को लेकर वैज्ञानिकों ने बारीकी से अध्ययन शुरू कर दिए हैं। अंतरिक्ष दूरबीन कैप्लर का सहारा भी लिया गया। यह दूरबीन रोशनी की एक फीसदी की घटत-बढ़त को मापने में सक्षम है और 800 से अधिक ग्रहों को खोज चुकी है।
विशेष बात यह थी कि एक बार इसकी चमक सामान्य से 22 प्रतिशत कम हो गई। वैज्ञानिक अंत में इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि किसी धूमकेतु की रोशनी से तारे की चमक में बदलाव आया है। माना गया कि किसी धूमकेतु परिवार के इस तारे के नजदीक आते ही वह बिखर गया होगा।

आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान एरीज के वैज्ञानिक डॉ. शशिभूषण पांडे का कहना है कि बिना प्रमाण के एलियंस के वजूद का प्रश्न बना ही रहेगा। तारा केआइसी 8462852 की चमक में बदलाव कॉमेट के अलावा तारे के अपने किसी कारण भी हो सकता है। वहीं तारा भौतिकी संस्थान बंगलुरु के खगोल वैज्ञानिक प्रो. आरसी कपूर का कहना है कि वास्तव में किसी तारे की चमक में इस तरह का अंतर असामान्य है। जिस तरह नवीन उपकरणों का विकास हो रहा है तो एलियंस की खोज भी आसान हो जाएगी।