उत्तराखंड में रेशम उत्पादकों के लिए बड़ी खुशखबरी है। शहतूत के 300 पेड़ लगाने पर अब बतौर प्रोत्साहन राशि सरकार से एक लाख रुपये दिया जाएगा। इस धनराशि से हॉल बनाया जा सकेगा। वहीं किसानों की तर्ज पर बागवानों को भी उद्यानिकी के उपकरणों की खरीद के लिए 80 फीसदी सब्सिडी मिल सकेगी। आपदा प्रभावित क्षेत्रों में यह सब्सिडी 90 फीसद रहेगी। उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों को जल्द ही जैविक जिलों में बदला जाएगा।

कृषि और उद्यान मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि किसानों और बागवानों को प्रोत्साहित करने को लिए गए फैसलों का दूरदराज के इलाकों में अच्छा असर रहा है। रेशम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए शहतूत के पेड़ लगाने को प्रोत्साहन देने के साथ ही अन्य कई सुविधाएं भी मुहैया कराई जा रही हैं। एक लाख रुपये धनराशि से रेशम उत्पादक बड़े हॉल का निर्माण कर सकेंगे।

उन्होंने कहा कि माल्टा और गलगल का समर्थन मूल्य घोषित करने का अच्छा परिणाम सामने आया। इनकी खरीद के लिए आठ जिलों में 27 क्रय केंद्र बनाए गए थे। इन केंद्रों पर 72 क्वैंटल माल्टा और साढ़े तीन क्वैंटल गलगल की खरीद हुई। समर्थन मूल्य घोषित होने के बाद बागवानों को अच्छा बाजार मूल्य मिला और औने-पौने दामों पर खरीद की प्रवृत्ति पर अंकुश लगा। माल्टा के व्यावसायिक उत्पादन में इजाफा होगा।

mulberry

उत्तराखंड में माल्टा उत्पादन करीब 30 हजार मीट्रिक टन है। लाल मिर्च की खरीद के लिए भी क्रय केंद्र खोले जाएंगे। मिर्च उत्पादकों को पांच रुपये प्रति क्वैंटल बोनस भी दिया जाएगा।

हरीश रावत सरकार में कैबिनेट मंत्री ने कहा कि फलों और कृषि उत्पादों के लिए समर्थन मूल्य और बोनस योजना से पहाड़ की डूबती और बंजर होती खेती को बचाने में मदद मिलेगी। अब तक राज्य में 40 हजार जैविक किसानों का पंजीकरण किया जा चुका है। दस विकासखंडों को पूरी तरह जैविक विकासखंड घोषित किया गया है।

उन्होंने कहा, हर मंडी में जैविक उत्पादों के लिए चार दुकानें आरक्षित की गई हैं। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना की 36 करोड़ धनराशि की मदद से जैविक खेती को बढ़ावा दिया जाएगा।