नेपाल की राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी के काफिले पर भारतीय मूल के मधेसियों के हमले के एक दिन बाद गुरुवार को भारत ने कहा कि वह अपने इस पड़ोसी देश की घटनाओं पर करीबी नजर बनाए हुए है। भारत ने सभी पक्षों से इन मुद्दों का स्थायी हल के लिए सुलह की भावना से आगे बढ़ने की अपील की।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप से जब हमले वाली घटना के बारे में पूछा गया तो उन्होंने सीधा जवाब नहीं दिया लेकिन उन्होंने नेपाल के असंतुष्ट लोगों से जुड़े दो महत्वपूर्ण संशोधनों को पेश किए जाने पर भारत का रुख सामने जरूर रखा।

उन्होंने कहा, ‘दोनों संशोधन नेपाल सरकार एवं प्रदर्शनकारियों के बीच लंबित दो अहम मुद्दों- निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन और आनुपातिक समावेश से जुड़े हैं। वे 15 दिसंबर को नेपाली संसद में पेश किए गए हैं।’ उन्होंने कहा, ‘हम सभी पक्षों से सुलह की भावना से संवाद करते रहने और आगे बढ़ने के लिए अनुरोध करते हैं ताकि नेपाल के सामने मौजूद राजनीतिक मुद्दों का स्थायी हल हो। हम घटनाक्रम पर करीब नजर रख रहे हैं।’

नेपाल प्रशासन के अनुसार नेपाल की पहली महिला राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी बुधवार को जनकपुर में जानकी मंदिर के दर्शन के दौरान बाल-बाल बच गई जब मधेसियों ने उनके काफिले पर पथराव किया और पेट्रोल बम फेंका।

भारत का बयान ऐसे समय में भी आया है जब नेपाल के राजदूत दीप कुमार उपाध्याय ने कहा कि उनका देश भारत से लगती सीमा पर चार महीने की नाकेबंदी के चलते एक बड़े मानवीय संकट से गुजर रहा है, जिसकी आर्थिक कीमत विनाशकारी भूकंप से भी कहीं ज्यादा है।

उन्होंने बुधवार को मीडिया से बातचीत में नेपाल के लोगों के लिए गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा, ‘काफी हो गया.. आग लगाना बड़ा आसान है, लेकिन उसे बुझाना मुश्किल है। हम जनता के सभी वर्गों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए सभी संभव कदम उठाएंगे।’