अल्मोड़ा जिले में ताकुला विकासखंड की दर्जनों महिलाओं ने ग्राम प्रधानों के अधिकारों को लेकर सेमिनार किया। इसमें कई महिलाओं ने अपने-अपने क्षेत्र की समस्याएं भी बताईं। महिलाओं ने सोमेश्वर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों की कमी, मनरेगा में समय से मजदूरों का भुगतान न होने सहित क्षेत्र की कई समस्याएं सामने रखीं।

इसके साथ ही महिलाओं ने आरोप लगाया कि उन्होंने अपने क्षेत्र की समस्याएं जनप्रतिनिधियों के सामने रखी हैं, लेकिन उन पर कोई काम नहीं हो रहा है। ग्राम प्रधान बसंती देवी ने ग्राम स्वराज को लेकर कहा कि योजनाएं सरकारें ऊपर से थोप देती हैं, जिससे प्रधानों को काफी परेशानियां होती हैं।

इसके साथ ही महिलाओं ने कहा कि वो छोटे-छोटे काम के लिए सरकारी ऑफिसों के चक्कर लगाती रहती हैं। ग्राम प्रधान कौशल्या देवी का कहना है कि मनरेगा में 15 दिनों में मजदूरों को मजदूरी देने का प्रावधान है, लेकिन कई महीने बीतने के बाद भी लोगों को मजदूरी नहीं मिली है।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब लोगों को समय से मजदूरी ही नहीं मिलेगी तो उनसे काम कैसे कराया जाए। साथ ही कहा कि आज गांव का कोई भी व्यक्ति मनरेगा के कामों में काम करने को तैयार नहीं है, इसका कारण उन्हें समय से मजदूरी नहीं मिलना ही है।