उत्तर प्रदेश में लोकायुक्त की नियुक्ति के मामले में सुप्रीम कोर्ट के सीधे हस्तक्षेप के बाद अब उत्तराखंड की हरीश रावत सरकार भी राज्य में लोकायुक्त गठन को लेकर सक्रिय हो गई है।

करीब तीन साल की चुप्पी के बाद उतराखंड की कांग्रेस सरकार एक बार फिर लोकायुक्त की नियुक्ति का राग अलापती दिख रही है। दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार के जनलोकपाल का गठन करने और उत्तर प्रदेश में लोकायुक्त की नियुक्ति के चर्चा में आने के बाद उत्तराखंड की हरीश रावत सरकार भी इस दिशा में सक्रिय हो गई है।

मुख्यमंत्री हरीश रावत ने मौके की नजाकत को देखते हुए सचिव, भ्रष्टाचार उन्मूलन और सुराज सुशासन, डी. सेंथिल पांडियन को इस दिशा में कार्यवाही आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। गौरतलब है कि पूर्ववर्ती बीजेपी की खंडूडी सरकार ने अन्ना आंदोलन से निकले लोकपाल बिल को स्वीकार कर विधानसभा में पास कराया था।

राज्य में चुनाव के बाद कांग्रेस की सरकार आई और विजय बहुगुणा मुख्यमंत्री बने। बहुगुणा ने खंडूडी के लोकपाल में संशोधन करा इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया। हाल ही में दिल्ली सरकार ने लोकपाल बिल पास कर दिया।

उत्तराखंड की हरीश रावत सरकार भी अब पूरी तरह चुनावी मूड में आ चुकी है। ऐसे में तीन साल की नींद के बाद सरकार को लोकायुक्त की याद भी आ ही गई है। मुख्यमंत्री ने तीन साल की नींद के बाद अब आकर इस तरफ रुचि दिखाई है।