स्विटजरलैंड ने बुधवार को ही 2,600 निष्क्रिय खाताधारकों के नाम सार्वजनिक किए गए हैं। ये वो खाते हैं जिनमें पिछले लगभग 60 साल से कोई लेन-देन नहीं हुआ है। इन निष्क्रिय खातों में देहरादून के बहादुर चंद्र सिंह का नाम भी शामिल है।

स्विस बैंक द्वारा बताए गए नामों में चार भारतीयों के नाम शामिल हैं। इन चार भारतीय में से दो का निवास भारत में बताया गया है, जबकि बैंक के रिकॉर्ड के अनुसार एक का निवास पेरिस में बताया गया है। चौथे भारतीय खाताधारक के निवास स्थान का खुलासा नहीं किया गया है।

जिन चार भारतीय खाताधारकों के नाम सार्वजनिक किए गए हैं उनमें पियरे वाचेक, देहरादून के बहादुर चंद्र सिंह, पेरिस के डॉ. मोहन लाल और किशोर लाल शामिल हैं। वाचेक का निवास स्थान बांबे बताया गया है, जिसे अब मुंबई के नाम से जाना जाता है। वाचेक की जन्मतिथि का खुलासा भी किया गया है।

स्विटजरलैंड ने 2,600 खाताधारकों और 80 सेफ डिपॉजिट बॉक्स के मालिकों के नाम सार्वजनिक किए हैं। सार्वजनिक की गई सूची में वैसे खाते शामिल हैं जिसमें कम से कम 500 स्विस फ्रैंक जमा हैं और जिन पर कम से कम 60 साल से कोई दावा नहीं किया गया है।

इन खातों में 440 लाख स्विस फ्रैंक यानी करीब 300 करोड़ रुपये होने का अनुमान है। हालांकि, स्विटजरलैंड ने इस बात का खुलासा नहीं किया है कि भारतीय खाताधारकों के खातों में कितने पैसे हैं। स्विटजरलैंड ने पहले ही उन भारतीय और विदेशी खाताधारकों के नाम सार्वजनिक करने शुरू कर दिए हैं, जिनके बैंक खाते जांच के घेरे में हैं और जिनके बारे में विदेशी प्राधिकरणों ने पर्याप्त सबूत के साथ विस्तृत जानकारी मांगी है।

पहली बार स्विटजरलैंड ने ऐसी सूची जारी की है जहां के बैंक खाताधारकों की जानकारी गोपनीय रखने के लिए जाने जाते रहे हैं। इस सूची का प्रकाशन स्विस बैंक एसोसिएशन ने किया है। 2016 से प्रत्येक वर्ष ऐसे निष्क्रिय खातों से जुड़ी जानकारियां सालाना आधार पर सार्वजनिक की जाएंगी।

स्विस बैंकिंग ओम्बुड्समैन और स्विस बैंकर्स एसोसिएशन (एसबीए) ने कहा है कि खाताधारकों के रिश्तेदारों और उत्तराधिकारियों को इन खातों पर दावा करने के लिए एक से पांच साल का समय मिलेगा। पहली बार स्विटजरलैंड ने ऐसी सूची प्रकाशित की है, जिसका लक्ष्य खाताधारकों के उत्तराधिकारियों को खाते में पड़े पैसों का दावा करने का अवसर उपलब्ध कराना है।

एसबीए ने कहा है कि अगर संबंधित पक्ष की तरफ से सूची प्रकाशित होने से एक साल के भीतर कोई दावा नहीं किया जाता है तो कानून के मुताबिक बैंक खाते में पड़ी परिसंपत्ति सरकार को हस्तांतरित कर देगी। जो खाते कम से कम 1954 से निष्क्रिय पड़े हैं उन पर पांच साल तक दावा किया जा सकता है।

स्विस बैंकर्स एसोसिएशन के सीईओ क्लाउडे-एलायन मार्गेलिश्च ने कहा, ‘इस सूचना को प्रकाशित कर बैंक ग्राहकों से संपर्क करने की आखिरी कोशिश कर रहा है। यह प्रकाशन ग्राहकों और उनके कानूनी उत्तराधिकारियों को निष्क्रिय खातों पर दावा करने का अवसर उपलब्ध कराती है। अगर उन्होंने समय रहते दावा नहीं किया तो बैंक निश्चित रूप से परिसंपत्तियां सरकार को हस्तांतरित कर देंगे।’