देहरादून जिले के जोहड़ी गांव के लोगों की समस्या न प्रशासन ने सुनी, न ही सरकार के मंत्रियों ने इस तरफ ध्यान दिया। यहां तक कि मुख्यमंत्री कार्यालय ने भी उनकी सुध नहीं ली। आखिरकार मजबूर होकर ग्रामीणों ने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) का दरवाजा खटखटाया और उनकी मुराद पूरी हो गई।

अस्थायी राजधानी देहरादून में राज्य का पूरा शासन-प्रशासन बैठता है, इसके बावजूद यहां का ये हाल है तो राज्य के दूरदराज के इलाकों का क्या हाल होगा? यहां के लोगों की मांग ऐसी भी नहीं थी कि उसे आसानी से पूरा किया जा सकता था, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। हालात ये हैं कि महज स्ट्रीट लाइट लगाने की मांग लिए यहां के लोगों को पीएमओ की चौखट पर जाना पड़ा।

दरअसल, देहरादून के जोहड़ी गांव में रहने वाले लोग स्ट्रीट लाइट्स न होने से खासे परेशान थे। अस्थायी राजधानी के मुख्य राजपुर रोड से महज एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस गांव के हजारों लोगों को रात के समय खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था।

इसमें सबसे बड़ी समस्या उन अराजक तत्वों की थी जो रात के समय इधर से गुजरने वालों को अपना निशाना बनाते थे। सामाजिक कार्यकर्ता एसपी शर्मा और कुछ अन्य लोगों ने स्ट्रीट लाइट लगाने के लिए देहरादून जिला प्रशासन, शासन, सीएम ऑफिस, कांग्रेस अध्यक्ष सहित तमाम माननीयों से गुहार लगाई, लेकिन सुनवाई कहीं नहीं हुई।

थक हारकर एसपी शर्मा प्रधानमंत्री ऑफिस दिल्ली पहुंच गए। पीएमओ में इनके द्वारा अपनी मांग को लेकर एक प्राथर्ना पत्र दिया गया। पीएमओ ने बिना देर किए सीधे देहरादून के मेयर विनोद चमोली को फोन किया और इनकी समस्या का निस्तारण करने को कहा।

फिर क्या था प्रधानमंत्री कार्यालय के निर्देशों का पालन तुंरत किया गया और जोहड़ी गांव में दस जगहों पर स्ट्रीट लाइट्स लगा दी गई। इससे गांव के लोग खासे खुश हैं और वे पीएमओ का शुक्रिया अदा कर रहे हैं।