कुमाऊं-गढ़वाली गायिका हेमा करासी न्यूजीलैंड जा रही हैं। वहां जा बसे पर्वतीय लोगों के बीच वह क्षण भी अद्भुत ही होगा, जब हेमा अपने आंचलिक गीतों को प्रस्तुत करेंगी। हेमा करासी की जिंदगी में एक कठिन और लंबा संघर्ष रहा है। लेकिन लोकगायिकी की यह साधना कभी रुकी नहीं। उन्होंने जागर की कठिन विधा को सीखा। उसके गूढ़ भाव को समझा और आज उनका कोई कार्यक्रम बिना जागर के नहीं होता।

न्यूजीलैंड की आबोहवा भी उत्तराखंड के पहाडों जैसी ही है। बहुत सुंदर शांत लोग हैं। इस देश को हमने एडमंड हिलेरी और क्रिकेट के पूर्व कप्तान ग्लेन टर्नर से जाना है। हिलेरी ने तेनसिंग के साथ एवरेस्ट शिखर छुआ, ग्लेन टर्नर ने कीवी टीम का शानदार नेतृत्व किया और कानपुर की लड़की से विवाह रचाया।

ऑस्ट्रेलिया में धमक है तो न्यूजीलैंड में अपनी तरह की शांति है। अपने पहाडों का सा मौसम, बेहद आत्मीयता से भरे गोरे लोग। वहीं अपने उत्तराखंड के प्रवासी भी हैं। अपनी माटी से जुड़े हुए हैं। इसलिए कभी नरेंद्र सिंह नेगी को बुलाते हैं, तो कभी हेमा को। इसी न्यूजीलैंड में उत्तराखंड से गए एक प्रवासी ने होटलों की श्रंखला चलाई और सफल उद्ममी बन गए।

आकलैंड या वेलिंगटन जहां भी हेमा करासी अपने गीतों को गाएंगी, जरूर कुछ न कुछ एहसास छोड़ जाएंगी। उत्तराखंड में अब भी बहुत कुछ शुभ है।