नई दिल्ली।… नेपाल ने बुधवार को कहा कि भारत के साथ लगी सीमा पर चार महीने से चल रही नाकेबंदी की वजह से देश बड़े मानवीय संकट से गुजर रहा है, जिसकी आर्थिक कीमत का असर इस देश में आए विनाशकारी भूकंप से ज्यादा है। नेपाल ने आश्वासन दिया कि आंदोलन कर रहे मधेसियों की शिकायतों का तेजी से निवारण किया जा रहा है।

नेपाल के राजदूत दीप कुमार उपाध्याय ने कहा कि चीन के रास्ते तेल, गैस और अन्य जरूरी चीजें लाना दुर्गम संपर्क और अधिक लागत की वजह से व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। उन्होंने कहा, भारत को इस देश में आपूर्ति सुनिश्चित करनी चाहिए।

नेपाल की जनता के लिए गहरी पीड़ा व्यक्त करते हुए नेपाली राजदूत ने मीडिया से बातचीत में कहा, ‘बहुत हो गया। आग लगाना आसान है लेकिन उसे बुझाना मुश्किल है। हम हर वर्ग की जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे।’

तराई क्षेत्र के भारतीय मूल के मधेसियों की मांगों पर उन्होंने कहा, ‘हम गणित नहीं बदल सकते। कोई हारा हुआ खेल खेलना पसंद नहीं करता।’ उन्होंने कहा कि बंद की वजह से नेपाल तस्करों और बिचौलियों का अड्डा बन गया है।

उपाध्याय ने कहा, ‘जनता के सभी वर्गों की आकांक्षाओं को पूरा करना नेपाल की संसद और सरकार की जिम्मेदारी है। हम ऐसा करेंगे। कुछ संशोधनों के लिए हमें दो-तिहाई बहुमत चाहिए।’ उन्होंने कहा, ‘हो सकता है कि हमने कुछ गलत फैसले लिए हों। लेकिन हम इसे सुधारने के लिए सभी प्रयास करेंगे।’

नेपाली राजदूत ने कहा कि मधेसियों ने केवल भारत-नेपाल सीमा पर बीरगंज-रक्सौल व्यापार मार्ग को बंद किया है और छह अन्य बिंदुओं से आपूर्तियां भेजी जा सकती हैं। उन्होंने कहा, ‘नेपाल में बड़ा मानवीय संकट है। बंद की वजह से जो कीमत चुकानी पड़ रही है वह विनाशकारी भूकंप की वजह से हुए नुकसान से ज्यादा है।’

उपाध्याय ने कहा, ‘हम मुश्किल दौर में हैं। बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे, क्योंकि डीजल और पेट्रोल की कमी की वजह से परिवहन के साधन बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। अस्पतालों में दवाएं नहीं हैं। गृहिणियों को भोजन बनाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, क्योंकि एलपीजी सिलेंडरों की बड़ी कमी है।’

चीन से तेल लाने की नेपाल सरकार की योजना पर उन्होंने कहा, ‘चीन हमसे कह रहा है कि भारत के जरिए तेल और अन्य उत्पाद प्राप्त करना नेपाल के लिए आसान और सस्ता होगा। उन्होंने हमसे भारत के साथ मुद्दों को सुलझाने को कहा है।’ उन्होंने कहा कि चीन से तेल लाने के लिए वहां से तिब्बत के रास्ते नेपाल तक पाइपलाइन या सुरंग बिछाई जा सकती है लेकिन यह दीर्घकालिक विकल्प होगा, जिससे भारत को भी लाभ होगा।

राजदूत ने कहा कि लोकतंत्र में स्वसुधार की प्रणाली होती है और आंदोलनकारियों द्वारा उठाए गए मुद्दों पर तेजी से ध्यान दिया जा रहा है। मधेसी समुदाय नए संविधान के तहत देश को सात प्रांतों में बांटने का विरोध कर रहा है और अपने अधिकारों के लिए पर्याप्त संरक्षण की मांग कर रहा है।