खालिस्तान समर्थक आतंकवादी इस मैप का इस्तेमाल करते हैं

देवभूमि उत्तराखंड पर आतंकवादियों कि नजर लगी हुई है। यहां का तराई-भाबर इलाका खालिस्तानियों के निशाने पर है। आशंका है कि खालिस्तान की आवाज यहां भी गूंज सकती है।

पंजाब के अमृतसर में भिंडरवाला के समर्थक खुलकर सामने आने के बाद यहां भी धार्मिक स्थलों पर सत्संग के माध्यम से सिखों को भड़काने की कोशिशें की जा रही हैं। हालांकि, खुफिया तंत्र इसे लेकर अलर्ट है और पूरे मामले में पैनी नजर रखे हुए है।

करीब तीन महीने पहले अमृतसर में भिंडरवाला के समर्थक खुलकर सामने आए थे, जिसके बाद उनकी मांगों के समर्थन में ऊधमसिंह नगर में भी प्रदर्शन हुआ था। तब तत्कालीन एसएसपी नीलेश आनंद भरणे ने प्रदर्शन करने वालों को चिन्हित करने के निर्देश भी दिए थे।

सूत्रों के मुताबिक अक्टूबर में पंजाब के फिरोजपुर में गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी की घटना के बाद भी तराई क्षेत्र के धार्मिक स्थलों पर खालिस्तान समर्थक देखे गए। क्षेत्र में उनकी गतिविधियों से खालिस्तान की आग यहां भी फैलने की आशंका है।

बताया जाता है कि पिछले दिनों पंजाब के गुरदासपुर और अमृतसर जिले के बॉर्डर पर रहने वाला प्रमुख खालिस्तानी समर्थक क्षेत्र में घूम रहा था। यहां तक कि उसने सिखों के धार्मिक स्थलों पर आयोजित सत्संग में भी भाग लिया था। इसकी पुष्टि 1984 के दंगा पीड़ित पंजाबी मूल के एक परिवार ने भी की।

तराई का इलाका कौमी एकता का गुलदस्ता माना जाता है। अगर यहां भी खालिस्तान की आवाज उठी तो इस गुलदस्ते की माला बिखर सकती है। वहीं, खुफिया तंत्र भी खालिस्तानियों के तराई में देखे जाने को लेकर अलर्ट हो गया है और पंजाब से आने वाले खालिस्तान समर्थकों को चिन्हित करने में लगा है।