सांकेतिक तस्वीर

उत्तरकाशी के विभिन्न क्षेत्रों में इन दिनों बग्वाल महोत्सवों की धूम है। रवांई घाटी के बनाल पट्टी में शनिवार सुबह को बग्वाल मेले का समापन हो गया।

बनाल पटटी के 45 गांवों के ग्रामीण रात को गैरगांव स्थित रघुनाथ मंदिर में इकट्ठा हुए। रात-भर पूजा अर्चना के बाद जंगल से लाए गई देवदार की लकड़ियां बांधी गईं। इन्‍हीं लकड़ियों को एक गहरे गड्ढे में डालकर अग्निकुंड में खड़ा किया गया।
इसके बाद लोगों ने इसके चारों ओर डांस किया। यह परंपरा सालों से चली आ रही है। इस अद्भुत नृत्‍य को देखने के लिए लोग विदेशों से भी यहां आते हैं।

Bagwal-mela

अपनी तरह के इस अनोखे उत्सव को देखकर यहां आने वाले लोग काफी खुशी महसूस करते हैं। पीढ़ियों से इन महोत्सवों को मनाते चले आ रहे लोगों को इसका हर साल बेसब्री से इंतजार रहता है। यह महोत्सव उनके लिए अपनी जड़ों से जुड़े रहने के लिए एक मजबूत कड़ी का भी काम करता है।