करीब ढाई साल पहले आयी भीषण केदारनाथ आपदा के पीड़ितों को सरकार की ओर से अब तक मुआवजा नहीं मिल पाया है, जिससे उनमें सरकार और प्रशासन के खिलाफ जबरदस्त आक्रोश है। पीड़ितों ने बताया कि सरकार और अधिकारी अपना वादा निभाने में असफल रहे हैं। ऐसे में आपदा प्रभावित व्यवसायी खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं।

साल 2013 के 16-17 जून को केदारनाथ से आई आपदा में सोनप्रयाग तबाह हो गया था। आपदा में बमुश्किल 15 दुकानें ही बची थीं। पीड़ितों ने परिवार के लालन-पालन की समस्या को देखते हुए क्षतिग्रस्त भवनों पर ही रोजगार चलाया हुआ है, जिस स्थान पर ये दुकानें आपदा से बची हैं, वहां पर पार्किंग का निर्माण किया जाना है। ऐसे में सरकार की ओर से पीड़तों को भवन निर्माण के लिए मुआवजा और जगह के साथ एक दुकान बनाकर देने का आश्वासन दिया गया। तीस नवंबर तक पीड़ितों को मुआवजा देने की बात कही गई, लेकिन पीड़ितों को मुआवजा नहीं मिल पाया है।

आपदा पीड़ितों का कहना है कि शासन-प्रशासन अपनी बातों पर खरा उतरने में सक्षम नहीं दिखाई दे रहे हैं। आश्वासन के बाद भी प्रशासन का कोई अधिकारी पीड़ितों के बीच नहीं पहुंचा है। प्रशासन के कहने पर पीड़ित भवनों से सामान निकालकर अन्य जगहों पर शिफ्ट हो गए हैं, लेकिन भवनों को तब तक तोड़ने नहीं दिया जाएगा, जब तक मुआवजा नहीं मिल जाता। पीड़ित व्यवसायी साल 1962 से सोनप्रयाग में रोजगार चला रहे हैं।

तस्वीर : साभार अमर उजाला
तस्वीर : साभार अमर उजाला

जिलाधिकारी डॉक्‍टर राघव लंगर ने कहा कि सोनप्रयाग में मल्टी लेबल पार्किंग के साथ शॉपिंग कॉम्प्लैक्स का निर्माण किया जाना है। इसकी लागत 70 करोड़ है। पीड़ित व्यवसायियों के मुआवजे का जीओ जारी कर दिया गया है। एक करोड़ 76 लाख का मुआवजा दिया जाना है। बहुत जल्द ही धनराशि उपलब्ध होने जा रही है, जिसके बाद पीड़ितों को मुआवजा दिया जाएगा।