उत्तरकाशी जिले के कई गांवों में शुक्रवार 11 दिसंबर को मंगसीर की बग्वाल (दिवाली) धूमधाम से मनाने की तैयारी जोरों पर है। घर-घर में दिवाली में बनाए जाने वाले पकवान उड़द की दाल के पकोड़े और आलू, गहथ की भरी पूरियां बनाने की तैयारी पूरी की जा चुकी है।

मंगसीर की दिवाली का यहां के ग्रामीणों को महीनों पहले से इंतजार होता था। इस दौरान ग्रामीणों का खेतों का काम निपट जाता है। ऐसे में त्योहार को हर्षोल्लास से मनाया जाता है।

दिवाली पर ग्रामीण गांव की थाती पर एकत्र होकर एक साथ भैले (छिलुकों से बनाया हुआ) जलाकर देर रात तक ढोल-दमाऊ की थाप पर डांस करते हैं और एक-दूसरे के घर में पकवानों से भरी थालियां भेंट करते हैं।

हालांकि अब पलायन से खाली होते गांवों में त्योहारों की रौनक भी कम होने लगी है। इस त्योहार की पौराणिक रंगत व महत्व को बचाने के लिए साल 2010 से मुख्यालय में अंनघा माउंटेन एसोसिएशन की ओर से हर साल मंगसीर की बग्वाल पर ढोल-दमाऊ की थाप पर भैलो डांस किया जाता है।

कार्यक्रम में हर साल विदेशी पर्यटक बड़ी तादाद में शिरकत करते हैं। शुक्रवार को भी रामलीला मैदान में बाड़ाहाट की बग्वाल के नाम से कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।