उत्तराखंड बीजेपी अध्यक्ष तीरथ सिंह रावत के कार्यकाल के पिछले महीने समाप्त होने के बाद उनके विकल्प के तौर पर एक ऐसे मजबूत नेता की तलाश की जा रही है जो साल 2017 की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी में जान फूंक सके।

एक वरिष्ठ पार्टी नेता ने नाम न छापे जाने की शर्त पर कहा कि फिलहाल पार्टी के सामने सबसे बडी चुनौती साल 2017 में होने वाले राज्य विधानसभा चुनाव हैं और राज्य इकाई का नेतृत्व किसी ऐसे क्षमतावान नेता के हाथ में दिया जाना चाहिए जो इस चुनौती से निपटने में सक्षम हो। उन्होंने कहा कि इस समय पार्टी में एक आम राय यही है।

तीनों पूर्व मुख्यमंत्रियों भुवन चंद्र खंडूड़ी, भगत सिंह कोश्यारी और रमेश पोखरियाल निशंक जैसे पार्टी के अगली पंक्ति के नेताओं के लोकसभा सांसद बन जाने के बाद बीजेपी की उत्तराखंड इकाई काफी लंबे समय से एक ऐसे मजबूत नेता की तलाश में है जिसकी अगुवाई में पार्टी 2017 विधानसभा चुनाव में जीत का मिशन सफल कर सके।

हालांकि, बीजेपी नेता ने कहा कि राज्य बीजेपी में नेतृत्व परिवर्तन की कवायद को अभी दिसंबर के आखिर तक इंतजार करना पड़ेगा, क्योंकि पार्टी की निर्णय लेने वाली सर्वोच्च संस्था संसदीय बोर्ड की बैठक अभी नहीं हुई है। संसदीय बोर्ड की बैठक में ही राज्य अध्यक्ष की नियुक्ति से पहले आवश्यक प्रक्रिया के तौर पर पर्यवेक्षक नियुक्त किए जाते हैं।

नेता ने भरोसा जताया कि विधानसभा चुनावों के मद्देनजर पार्टी में अध्यक्ष पद पर किसी मजबूत नेता की नियुक्ति कोई बहुत कठिन काम नहीं है और पार्टी की राज्य इकाई में इस जिम्मेदारी को निभाने लायक दूसरी और तीसरी पंक्ति के कई क्षमतावान नेता मौजूद हैं।

प्रदेश बीजेपी के सह मीडिया प्रभारी अभिमन्यु ने कहा, बीजेपी में अध्यक्ष पद के लिए नेताओं की कोई कमी नहीं है। तीनों पूर्व मुख्यमंत्रियों सहित पार्टी के पास अगली पंक्ति के नेताओं की मजबूत फौज है। इसके साथ ही दूसरी पंक्ति में भी कई नेता बहुत मजबूत है। पार्टी के एक नेता ने नाम न छापे जाने की शर्त पर कहा कि राज्य अध्यक्ष पद के लिए तीनों पूर्व मुख्यमंत्रियो के अलावा कई अन्य नेताओं के नाम दावेदारों के तौर पर उभर रहे हैं, लेकिन राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता अजय भट्ट आखिरी पसंद बन सकते हैं।

उन्होंने कहा, ‘तीनों पूर्व मुख्यमंत्रियों को अध्यक्ष बनाये जाने की संभावना नहीं लगती, क्योंकि ये जिम्मेदारी किसी ऐसे नेता को दी जानी चाहिए जो अगले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर अपना पूरा समय पार्टी को दे सके। सभी पूर्व मुख्यमंत्री इस समय लोकसभा सांसद है और अपनी जिम्मेदारियों में व्यस्त हैं।’

नेता ने कहा कि ऐसे में भट्ट के अलावा, झारखंड में पार्टी मामलों के प्रभारी त्रिवेंद्र सिंह रावत, प्रदेश पार्टी के पूर्व महामंत्री धन सिंह रावत के नाम पर अध्यक्ष पद के लिए सहमति हो सकती है। हालांकि, इस मामले में तस्वीर 15 दिसंबर को होने वाली पार्टी संसदीय बोर्ड की बैठक के बाद ही साफ हो पाएगी।