सांकेतिक तस्वीर

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में लुम्ती से घरूड़ी गांव जाने के लिए गोरी नदी में लोक निर्माण विभाग की लापरवाही से गरारी का एंगल टूट गया, जिससे ट्रॉली की आवाजाही बंद हो गई। शनिवार को घरूड़ी गांव से जीआईसी बरम और राजकीय हाईस्कूल लुम्ती में पढ़ने आए 60 विद्यार्थी लुम्ती में ही फंस गए।

ये संयोग ही था कि बच्चों के आने से पहले ही गरारी का एंगल टूट गया था, नहीं तो बड़ा हादसा हो सकता था। स्थानीय लोगों ने रात में बच्चों को अपने घरों में शरण दी। रविवार को घरूड़ी गांव के लोगों ने गरारी की मरम्मत कर बच्चों को घर तो पहुंचा दिया, लेकिन जोड़ा गया एंगल सोमवार सुबह फिर से टूट गया। इस कारण ये बच्चे सोमवार को स्कूल नहीं जा पाए।

लुम्ती से घरूड़ी गांव को जोड़ने के लिए गोरी नदी पर बना झूलापुल 2013 की आपदा के समय बह गया था। डेढ़ साल पहले लोनिवि अस्कोट ने झूलापुल के स्थान पर लोगों की आवाजाही के लिए गरारी तो लगा दी, लेकिन इसकी कभी देखरेख नहीं की। पिछले कुछ दिनों से गरारी का एक एंगल हिलने लगा था। शनिवार को यह पूरी तरह टूट गया। इस कारण घरूड़ी से स्कूल आए बच्चे घरों को नहीं जा पाए।

गांव के लोगों ने बताया कि यह गरारी अब खतरनाक हालत में पहुंच गई है। इससे आर-पार जाने का जोखिम नहीं लिया जा सकता। कम से कम छोटे बच्चों को तो गरारी से भेज पाना संभव नहीं है। गरारी बंद हो जाने के कारण लोगों को 16 किमी का पैदल सफर तय कर बरम के पास बने पुल से नदी पार करनी पड़ेगी।

गांव के समाजसेवी गंभीर सिंह सामंत और बीजेपी विधानसभा क्षेत्र प्रभारी जगत मर्तोलिया ने कहा कि मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र में आपदा राहत कार्यों की हकीकत ऐसी है। जहां पर जरूरत है वहां पर आपदा का पैसा नहीं लग रहा है। उन्होंने कहा कि तत्काल गरारी की मरम्मत की जाए और झूलापुल का निर्माण शुरू किया जाए। लोनिवि अस्कोट के ईई से भी उन्होंने बात की है और गरारी की खतरनाक हालत की जानकारी दी है।