उत्तराखंड में चमोली जिले के कांडा गांव में दो लड़कियां तीन साल से एक ही कमरे में कैद होने को मजबूर हैं। घर से बाहर सूर्य की रोशनी में आते ही वे लड़खड़ाकर गिर पड़ती हैं। उनकी आंखें बंद हो जाती हैं और आंसू बहने लगते हैं।

तीन साल पहले तक दोनों बालिकाएं सामान्य थीं। लेकिन अचानक दोनों को ऐसी बीमारी ने घेरा कि धूप में आते ही आंखें चुंधियाने लगीं। गरीबी के चलते इनके पिता इन्हें किसी बड़े अस्पताल में भी नहीं दिखा पाए। इस वजह से अब तक बीमारी का भी पता नहीं चल पाया।

दशोली ब्लॉक में कांडा गांव के दलीप सिंह तीन बेटियों विनीता (18), रुचि (16), विजया (13) और एक बेटे हरीश (23) के पिता हैं। विनीता 12वीं कक्षा में पढ़ती रही है, जबकि रुचि और विजया तीन साल से अजीब-ओ-गरीब बीमारी से ग्रसित हैं। ये दोनों बहनें सूर्य की रोशनी शरीर पर पड़ते ही लड़खड़ाकर गिर पड़ती हैं।

दलीप सिंह अपनी दो बेटियों को एक जैसी बीमारी होने से गहरे सदमे में हैं। वे मेहनत मजदूरी करके परिवार चला रहे हैं। ऐसे में गरीबी के कारण किसी बड़े अस्पताल में इनकी जांच भी नहीं करवा पाए हैं।

vineeta-vijaya-chamoli

दलीप सिंह की पत्नी बच्ची देवी ने बताया कि दोनों बेटियों के शरीर में यह बदलाव अचानक आया है। लिहाजा इनकी पढ़ाई भी पांचवीं से आगे नहीं बढ़ पायी। बीमारी के बाद से इन्हें पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ी। उनका बेटा हरीश भी गरीबी के चलते दो साल पहले नवीं कक्षा के बाद अपनी पढ़ाई छोड़ चुका है।

इस बीच सरकार और प्रशासन से भी परिवार को कोई मदद नहीं मिल पाई। गांव के निवासी आनंद सिंह झिंक्वाण ने बताया कि अब ग्रामीणों ने चंदा जुटाकर इन दोनों बहनों का इलाज कराने का निर्णय लिया है।

सोमवार को जिला मुख्यालय पहुंचे मुख्यमंत्री हरीश रावत को कांडा के ग्रामीणों ने दोनों बालिकाओं के बारे में बताया और इनके इलाज की मांग की। रुद्र सिंह भंडारी और ताजबर भंडारी ने बताया कि सरकार से यदि इन्हें मदद मिल जाए तो दोनों बहनें स्वस्थ हो सकती हैं। इस पर मुख्यमंत्री ने उन्हें हरसंभव मदद का आश्वासन दिया।

डॉक्टरों का कहना है कि अगर ये बालिकाएं रोशनी को सहन नहीं कर पा रही हैं तो यह मस्तिष्क में अधिक उजाला पहुंचने से हो रहा होगा। जांच के बाद ही बीमारी का सही पता चल सकता है। ऐसे मामलों में रोशनी आंखों के जरिए सीधे ब्रेन में पहुंचती है, ब्रेन में स्पाइकन हो जाता है, जिस कारण फोटो सेंस्टिविटी बढ़ जाती है। इस बीमारी की जांच संभव है और दवा से ये दोनों ठीक भी हो सकती हैं।

चमोली के प्रभारी डीएम संजय कुमार ने कहा, इन बालिकाओं के बारे में आज ही ग्रामीणों ने बताया है। इनकी सुध ली जाएगी। जल्द ही तहसील की टीम गांव भेजी जाएगी।