पुत्रदायिनी सती अनसूया माता मंदिर में दो दिवसीय मेला आगामी 24 दिसंबर से आयोजित होगा। मेला समिति के पदाधिकारियों ने जिला प्रशासन से मेले के दौरान मंडल घाटी में रसोई गैस, मिट्टी तेल व सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों में खाद्यान्न आपूर्ति की मांग की है।

मेला समिति के अध्यक्ष बीएस झिंक्वाण, पूर्व ब्लॉक प्रमुख भगत सिंह बिष्ट और क्षेत्र पंचायत सदस्य देवेंद्र सिंह बिष्ट ने मंडल घाटी के सस्ते गल्ले की दुकानों में कैरोसीन, खाद्यान्न और रसोई गैस की आपूर्ति सुनिश्चित कराने की मांग उठाई है।

पुत्रदायिनी माता अनसूया ने तीनों देवताओं (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) को अपनी कोख में जन्म दिया था। किवदंती है कि स्वर्ग लोक में जब माता पार्वती, लक्ष्मी और सरस्वती अपने-अपने रूपों की चर्चा कर रही थीं, तो वहां पहुंचे नारद मुनि ने उन्हें यह कहकर चौंका दिया कि उन तीनों से भी अधिक सुंदर पृथ्वीलोक में शक्ति सती अनसूया हैं।

तीनों देवियों ने ब्रह्मा, विष्णु महेश को इस देवी की शक्ति की परीक्षा लेने के लिए पृथ्वी लोक भेजा। जब तीनों देव साधुवेश में निर्जन वन में स्थित अत्री मुनि आश्रम पहुंचे तो यहां माता अनसूया के रूप को देख मोहित हो गए। उन्होंने माता अनसूया को बुरी नजर से देखा तो अनसूया ने अपने पति अश्री मुनि के कमंडल से पानी लेकर तीनों साधुओं के ऊपर छिड़का तो वे बालक रूप में प्रकट हुए। इसके बाद माता सती ने तीनों देवों को स्तनपान कराया।

करीब छह महीने तक माता सती ने तीनों देवों को बालक रूप में ही रखा। देवलोक में तीनों देवियां देवताओं के न पहुंचने पर परेशान हो गईं। तब नारद मुनि ने उन्हें पृथ्वी लोक का वृतांत सुनाया। तीनों देवियां पृथ्वीलोक पर पहुंची, और माता सती से क्षमा याचना की।

तीनों देवों ने भी अपनी गलती को स्वीकार कर छह माह तक माता के स्तनपान के चलते उनकी कोख से जन्म लेने का आग्रह किया। जिन्होंने बाद में दत्ताश्रेय के रूप में जन्म लिया। तभी से माता अनसूया को शक्ति शिरोमणि के रूप में पूजा जाता है।

माता अनसूया पुत्रदायिनी हैं। यहां हर साल नवंबर माह में अनसूया मेले का आयोजन होता है। इस दौरान निसंतान दंपति यहां रातभर हाथों में खड़े दिए रखकर पुत्र कामना लेकर पहुंचते हैं। बताते हैं कि आज तक जितने भी निसंतान दंपति यहां पहुंचे, उन्हें पुत्ररत्न की प्राप्ति हुई है।

ऐसे पहुंचे अनसूया के मंदिर
चमोली के जिला मुख्यालय गोपेश्वर से करीब 14 किमी वाहन से मंडल गांव पहुंचने के बाद 5 किमी पैदल दूरी तय कर अनसूया मंदिर पहुंचा जा सकता है। प्रकृति की गोद में बसा यह स्थान चारों ओर से ऊंची-ऊंची पर्वत श्रृंखलाओं से सुशोभित है। इसके नजदीक ही अत्रिमुनि आश्रम भी स्थित है।