देवभूमि उत्तराखंड में उत्तरकाशी जिले का गांव हरसिल सेब की खेती के लिए मशहूर है। इसके अलावा यह गांव इसलिए भी मशहूर है कि आज भी इस गांव में एक फिरंगी की आवाजें यहां के लोगों को सुनाई देती हैं। खास बात ये है कि यहां के सेब की खेती और उस अंग्रेज के बीच बहुत ही गहरा रिश्ता रहा है।

इस अंग्रेज को यहां पहाड़ी विल्सन या राजा विल्सन के नाम से जाना जाता है। विल्सन ही इस इलाके में सेब की खेती लेकर आया था। इसके बाद पहाड़ों की खामोशी में सिमटे इस इलाके के लोगों की जिंदगी में रौनक आ गई। ये बात 19वीं शताब्दी की है जब भारत में अंग्रेजों का शासन था और उस समय एडवेंचर खेलों का शौकीन और एक अंग्रेज व्यापारी फ्रेडरिक ई. विल्सन हरसिल गांव आया था। विल्सन ने यहां के लोगों को लकड़ी का व्यापार और सेब की खेती करना सिखाया था।

चांदनी रात और विल्सन की रूह
हरसिल गांव गंगोत्री के दर्शन करने वाले दर्शानार्थियों के लिए रुकने का स्थान है। यहां के ग्रामीण बताते हैं कि विल्सन की रूह अक्सर हम लोगों को दिखती है। गंगोत्री श्राइन के पुजारी ने अंग्रेजी अखबार हिंदुस्तान टाइम्स को बताया कि विल्सन की आत्मा आज भी यहां के बगीचों और पहाड़ों में भटकती है। ज्यादातर ये चांदनी रात में दिख जाती है।

क्यों दिखती है विल्सन की आत्मा
जब ग्रामीणों से पूछा गया कि इस अंग्रेज व्यापारी की आत्मा यहां क्यों भटकती है? इसके पीछे क्या वजह है तो भोले-भाले लोगों का जवाब चौंकाने वाला था। सेब की खेती करने वाले बहादुर सिंह का कहना है कि विल्सन की आत्मा पवित्र है। वो हमें याद दिलाती है कि हम लोग किस तरह से उनके आभारी हैं। धर्मवीर का कहना है कि उनको राजा हुलसेन के नाम से भी जाना जाता है। मरने के बाद विल्सन को मंसूरी में दफनाया गया था।

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इसी इलाके के रहने और लोक गायक रजनीकांत सेमवाल बताते हैं कि वो बचपन से विल्सन की कहानियां सुनते आ रहे हैं। विल्सन यहां पर पहली बार राजमा, सेम और सेब की खेती लेकर आया था।

कुछ लोगों को विल्सन से नफरत
विल्सन से जुड़े इतिहास का एक काला पहलू भी है। इलाके में ही कुछ लोग उसको प्राकृतिक संसाधनों का लुटेरा मानते हैं। वो कहते हैं कि उसने यहां पर बड़े पैमाने पर वन्य जीवों का शिकार किया और मजदूरों को गुलाम बनाकर रखा था। उसकी महत्वकांक्षा थी कि वो लकड़ी का व्यापार करके भारत का सबसे अमीर व्यक्ति बन जाए।

देवभूमि के देवताओं ने दिया श्राप
गंगोत्री श्राइन के पुजारी दयाराम सेमवाल कहते हैं कि विल्सन के वंश में कोई नहीं बचेगा, क्योंकि उसके पापों की वजह से उसे यहां के स्थानीय देवता ने श्राप दिया था। तभी उसके लकड़ी के गोदाम में आग लग गई थी।

विल्सन की वजह से गांव को मिली पहचान
एक सच्चाई ये भी की इस गांव को विल्सन की वजह से पहचान मिली है। आज उसका लकड़ी का घर वन विभाग के पास है, जिसे विल्सन हाउस कहा जाता है। जिस सेब के बगीचे को उसने यहां लगाया था उनके रस से यहां बियर बनाई जाती है।

हरसिल के सेबों और कुदरती खूबसूरती ने ब़ॉलीवुड को भी अपनी ओर खींचा है। शोमैन राजकपूर ने 1980 में अपनी फिल्म ‘राम तेरी गंगा मैली’ की शूटिंग यहीं पर की थी।