धार्मिक नगरी हरिद्वार में अगले साल जनवरी से लगने वाले अर्द्धकुंभ पर आतंकियों की नजर है। हरिद्वार अर्द्धकुंभ के बारे में आतंकियों ने काफी जानकारियां जुटाई हैं। आतंकी यहां बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में हैं।

आईएसआई एजेंट उत्तर प्रदेश के मेरठ निवासी एजाज अली से पूछताछ करने मेरठ गई एसटीएफ देहरादून को शनिवार को यह खुफिया जानकारी आतंकी ने दी है। ज्ञात हो कि सितंबर महीने में आईएसआई एजेंट एजाज अली को दबोचा गया था। पूछताछ के लिए मेरठ गई देहरादून एसटीएफ की एक टीम को पूछताछ में आतंकी ने खुफिया जानकारी दी।

एसटीएफ यह जानकारी जुटा रही है कि आतंकी अर्द्धकुंभ में किस तरह की वारदात को अंजाम देना चाहते हैं। सूत्रों का कहना है कि एजाज ने पूछताछ में हरिद्वार अर्द्धकुंभ की जानकारी एसटीएफ को दी है। दून एसटीएफ की टीम ने मेरठ एसटीएफ के अधिकारियों से भी आतंकी से अब तक मिली जानकारियों को भी जुटा रही है।

मेरठ से जासूसी के आरोप में गिरफ्तार आईएसआई एजेंट एजाज का मकसद उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में तबाही मचाना था। इन राज्यों में तबाही मचाने के बाद वह स्लीपिंग माड्यूल के सहारे उत्तराखंड सीमा से नेपाल भागने की फिराक में था।

उसने नेपाल के तराई के इलाके को भागने के लिए सेफ जोन बनाया था। नेपाल में आईएसआई की मदद करने के लिए दाऊद इब्राहिम कासकर ग्रुप तैयार बैठा है। आईबी को यह इनपुट मिलने के बाद उनकी टीमें नेपाल में बैठे एजाज के साथियों और दाऊद ग्रुप (डी कंपनी) के लोगों का मकसद भांपने में लगी हैं।

एजाज ने सुरक्षा एजेंसियों के सामने खुलासा कर दिया है कि उसके रिश्ते पाकिस्तान में दाऊद के रिश्तेदार और प्रसिद्ध पाक क्रिकेटर से भी है। एजाज के भाई फहद की तस्वीरें भी क्रिकेटर के साथ सुरक्षा अधिकारियों ने देखा है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि नेपाल में एजाज के कौन-कौन से लोग हैं।

क्योंकि नेपाल दाऊद और आतंकियों के लिए वर्तमान समय में सबसे महफूज ठिकाना हो गया है। पहले भी पूर्वांचल से फरार 10 आतंकियों को आईएसआई ने नेपाल में ही रखा था। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि पश्चिमी बंगाल की सीमा घुसने के लिए आसान है तो नेपाल भागने के लिए। आईएसआई का सहयोगी डी ग्रुप नकली नोटों और अपने आपराधिक कृत्यों के चलते उत्तर प्रदेश, मुंबई, दिल्ली, बिहार और उत्तराखंड में अपनी जड़ें जमाए हुए है।

उत्तराखंड में डी कंपनी अपने नेटवर्क के जरिए नकली नोटों का कारोबार फैलाए हुए है। पिछले दिनों अंबाला (पंजाब) में पकड़े गए जाली नोट के सौदागरों ने एनआईए (नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी) के सामने इसकी पुष्टि की।

आईएसआई ने अपने नेटवर्क को फैलाने के लिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर नेपाल तक स्लीपिंग माड्यूल तैयार कर रखे हैं जो समय-समय पर उसकी मदद करते रहते हैं। पता चला है कि ढाका (बांग्लादेश) में अड्डा जमाए आईएसआई एजेंट शमीम ने एजाज को बॉर्डर पार कराया था।

सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक आईएसआई और आतंकियों के मददगार स्लीपिंग माड्यूल कहलाते हैं। इनका काम एजेंटों को रास्ते दिखाना और उनके लिए आर्थिक मदद पहुंचाना होता है। स्लीपिंग माड्यूल हमेशा सक्रिय नहीं रहते हैं।