देवभूमि उत्तराखंड की धरती में सोने खजाना छिपा हुआ है। सालों पहले हुए सर्वे के अनुसार, राज्य के कई इलाकों में सोना मिलने की संभावना है, लेकिन सर्वे रिपोर्ट के बाद इस पर आगे काम नहीं हुआ। अधिकारी कहते हैं कि अभी प्रारंभिक स्तर पर ही काम किया जा रहा है।

उत्तराखंड की धरती सोने की धरती बन सकती है, क्योंकि यहां की मिट्टी में अपार सोना छिपा हुआ है। 80 के दशक में हुए सर्वे के दौरान पौड़ी और नैनीताल जिले के कई इलाकों में नमूनों की जांच में सोने की मौजूदगी देखी गई थी।

चमोली के चटवा पीपल इलाके में अलकनंदा के किनारे, ऋषिकेश में लक्ष्मण झूला, बागेश्वर में ग्वालदम क्षेत्र में और नैनीताल के देवीधुरा क्षेत्र में भी सोने की मौजूदा की संभावनाएं पाई गई हैं।

देवभूमि में इन स्थानों पर छिपा है सोने का भंडार

  1. कालाढूंगी से रामनगर बेल्ट में 25 किमी क्षेत्र में
  2. रामनगर से कोटद्वार बेल्ट में 30 किमी क्षेत्र में
  3. कालागढ़ से कोटद्वार बेल्ट में 30 किमी क्षेत्र में
  4. कोटद्वार से हरिद्वार बेल्ट में 40 किमी क्षेत्र में
  5. हरिद्वार से देहरादून बेल्ट में 40 किमी क्षेत्र मे
  6. देहरादून से यमुना रिवर बेल्ट में 35 किमी क्षेत्र में

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राज्य के खनन विभाग के अपर सचिव श्रीधर बाबू अधांकी कहते हैं कि राज्य में कई स्थानों पर सोने की मौजूदगी की संभावना है, लेकिन अभी सोने की मौजूदगी के मामले में जानकारी बहुत प्रांरभिक स्तर पर है।

अधांकी का कहना है कि अभी जो प्राथमिक स्तर की सर्वे रिपोर्ट है उसमें काफी लंबे क्षेत्र में सोने की मौजूदगी का जिक्र किया गया है, इसलिए और सटीक सर्वे अनुमान की जरूरत है।

करीब 4 साल पहले पिथौरागढ़ में सोने की खदान के लिए आदि गोल्ड माइंस नामक कंपनी ने सोने की मौजूदगी की संभावना जताते हुए, प्रारंभिक आंकलन करने की कोशिश की थी, लेकिन वन विभाग की क्लियरेंस में मामला लटका हुआ है।

सर्वे के हिसाब से ऊपरी और मध्य शिवालिक क्षेत्र में सोने की मौजूदगी की संभावनाए हैं। उधर राज्य की उद्योग और वित्त मंत्री कहती हैं कि इस मामले में केंद्र सरकार कदम उठाए तो राज्य सरकार मदद को तैयार है।

सोना कितना सोना है ये तो सोने की खोज करने के बाद ही पता चलेगा, लेकिन इतना जरूर है कि इस मामले में सरकार कदम आगे बढ़ाती है तो राज्य की धरती भी सोना उगल सकती है, ऐसी उम्मीद करना बेमानी नहीं होगा।