अस्थायी राजधानी देहरादून की आईटीआई निरंजनपुर में कक्षा में नियमित आने के बावजूद शिक्षक ने जानबूझकर उपस्थिति कम कर दी। जब छात्रों को इसकी भनक लगी तो उन्होंने हंगामा कर दिया।

छात्रों का आरोप है कि शिक्षक शीतल प्रसाद ने अप्राकृतिक संबंध नहीं बनाने पर उनकी उपस्थिति कम कर दी है। मामले की लिखित शिकायत की गई तो प्रिंसिपल ने पुलिस कार्रवाई करने के बजाए मामले को रफा-दफा कर दिया।

आईटीआई निरंजनपुर में आरएसी के शिक्षक शीतल प्रसाद की हरकतों की वजह से छात्र लंबे समय से परेशान हैं। बताया गया कि दो दिन पहले भी शीतल प्रसाद ने एक छात्र का हाथ पकड़ लिया था। छात्रों ने प्रिंसिपल को लिखित शिकायत की है कि उक्त शिक्षक उनसे जबरन संबंध बनाना चाहता है।

हाथ पकड़कर दोस्ती करने को बोलता है। शाम को चार बजे के बाद अपने कमरे पर बुलाता है। कुछ छात्रों ने आरोप लगाया कि टीचर शीतल प्रसाद ने उन्हें लंच के समय नीचे बेसमेंट में आने का दबाव भी बनाया। अब परीक्षा का समय आया तो नियमित आने वाले यह छात्र उपस्थिति कम होने की वजह से बाहर हो गए। इस पर छात्र भड़क गए।

छात्रों ने बुधवार को प्रिंसिपल को घेर लिया। छात्रों ने लिखित शिकायत की, लेकिन प्रिंसिपल ने मामले को बेहद हल्के में निपटा दिया। प्रिंसिपल एके त्रिपाठी से इस बारे में बात की गई तो उन्होंने हंसते हुए इस बात को स्वीकार किया कि आरोपी शिक्षक गलत प्रवृत्ति का है।

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प्रिंसिपल ने यह भी कहा कि शिक्षक ने खुद उनके खिलाफ कई आरटीआई लगाई हुई हैं। उन्होंने फिलहाल उसे क्लास से हटा दिया है। जब उनसे पूछा गया कि इतने गंभीर मामले की शिकायत पुलिस में क्यों नहीं की? तो उन्होंने कहा कि लड़के ही एफआईआर करा सकते हैं, मैं कैसे करा सकता हूं।

जबकि नियम के हिसाब से उन्हें पुलिस बुलाकर मामले की शिकायत करनी चाहिए थी। पुलिस जांच और कार्रवाई करती। प्रिंसिपल का कहना है कि वह गुरुवार को शिक्षक को संस्थान से हटाने की शिकायत निदेशक को करेंगे।

आरोपी टीचर शीतल प्रसाद का कहना है, छात्रों ने जो भी आरोप लगाए हैं, वह सरासर गलत हैं। मैं यह चाहता हूं कि कोई भी कदम उठाने से पहले मामले की जांच कराई जाए। एक या दो छात्र ही गलत आरोप लगा रहे हैं। मैं चाहता हूं कि पूरी क्लास के बच्चों से इस बारे में पूछताछ की जाए तो पता चल जाएगा। मैं कहीं भी गलत नहीं हूं। मैंने न तो किसी बच्चे का शोषण किया है और न ही जानबूझकर नाम काटा है।