उत्तराखंड की अस्थायी राजधानी देहरादून में स्टेट वार मेमोरियल सरकारी फाइलों का लंबा सफर पूरा करके जल्द ही जमीनी हकीकत पर पहुंचने वाला है। कम से कम सोमवार को रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर के बयानों से तो यह बात साबित हो ही गई। अगले साल की शुरुआत में देहरादून में उत्तराखंड के शहीद सैनिकों के सम्मान में युद्ध स्मारक की नींव रखी जाएगी।

देहरादून पहुंचे रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर ने यह घोषणा की। उन्होंने बताया कि वार मेमोरियल की फाइल मंत्रालय में अंतिम प्रक्रिया में है। उन्होंने पूर्व सैनिकों को भरोसा दिलाया कि जनवरी 2016 तक यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। उसके बाद वे खुद वार मेमोरियल का शिलान्यास करने के लिए दून आएंगे।

सोमवार को दून स्थित राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कॉलेज की ग्रेजुएशन सेरेमनी में शिरकत करने पहुंचे रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर से पूर्व सैन्य अफसरों का शौर्य दल राज्यसभा सांसद तरुण विजय के नेतृत्व में मिला। सांसद तरुण विजय लंबे समय से वार मेमोरियल निर्माण के लिए प्रयासरत हैं। उनकी पहल से ही यह मामला सैन्य भूमि हस्तांतरण तक पहुंचा है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि इस मामले की फाइल उनके मंत्रालय में पहुंच गई है। इस पर काम चल रहा है। जल्द ही इसे हरी झंडी दे दी जाएगी। उन्होंने पूर्व सैन्य अफसरों को आश्वासन दिया कि जनवरी 2016 में स्टेट वॉर मेमोरियल का शिलान्यास किया जाएगा, जिसमें वे खुद मौजूद होंगे। इस पर पूर्व अफसरों ने उनका आभार जताया और जल्द से जल्द फाइल निपटाने की उम्मीद जतायी।

गौरतलब है कि सैन्य परंपराओं वाले उत्तराखंड की स्थापना होने के बाद से आज तक यहां वॉर मेमोरियल का निर्माण नहीं हो पाया है। इस मौके पर रक्षा मंत्री ने पूर्व सैन्य अफसरों को बताया कि वन रैंक वन पेंशन (ओआरओपी) को बेहद सोच समझकर लागू किया गया है। हो सकता है कि इसमें कुछ खामियां हों। हम सब एक साथ बैठकर उनको दूर कर सकते हैं।

उन्होंने मेडल वापसी जैसा कदम उठाने के बजाए साथ मिलकर हल निकालने पर जोर दिया। रक्षा मंत्री हर घर फौजी की उत्तराखंड की परंपरा से काफी अभिभूत नजर आए। उन्होंने कहा कि यह हमारा सौभाग्य है कि हमारे पास ऐसा भी राज्य है, जहां से सबसे अधिक युवा इस वक्त सेना में अपनी सेवाएं दे रहे हैं और इतनी ही संख्या में पूर्व फौजी व अफसर यहां निवास करते हैं।

चीड़ बाग में सेना के अधिकार क्षेत्र वाली 6 एकड़ बी-3 श्रेणी की भूमि को स्टेट वार मेमोरियल के लिए हस्तांतरित किया जाना है। भूमि हस्तांतरण के लिए सेना का अनुमोदन मिल चुका है। रक्षा मंत्रालय से अनुमोदन मिलते ही रक्षा संपदा महानिदेशालय से भूमि कैंट बोर्ड को ट्रांसफर कर दी जाएगी। इस प्रक्रिया में लगभग एक महीने का समय लगेगा।

रक्षा मंत्री ने ऐतिहासिक राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कॉलेज (आरआईएमसी) की सीटों की संख्या 25 से बढ़ाकर 50 करने पर भी सहमति जताई। उन्होंने कहा कि इसके लिए कॉलेज की ओर से प्रस्ताव बनाकर भिजवा जाए। वे कॉलेज को मॉडल के तौर पर विकसित करने को भी आतुर दिखे। सोमवार को यहां पहुंचे पर्रिकर ने सबसे पहले शहीदों को श्रद्धांजलि दी।