उत्तराखंड की अस्थायी राजधानी देहरादून में चाय बागान की भूमि को खरीद कर उसकी जगह स्मार्ट सिटी बसाई जाएगी, जिसका विस्तार 1200-1900 एकड़ क्षेत्रफल में होगा।

उत्तराखंड के शहरी विकास मंत्री प्रीतम पंवार ने रविवार को देहरादून में संवाददाताओं को यह जानकारी देते हुए बताया कि केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी स्मार्ट सिटी योजना के पहले चरण में चिन्हित 98 शहरों में से एक देहरादून भी है और उसे स्मार्ट सिटी के तौर पर विकसित करने के लिए दो चाय बागान से भूमि खरीदने के विषय में चल रही बातचीत अंतिम चरण में है।

उन्होंने बताया कि शिमला बाईपास क्षेत्र में स्थित इन चाय बागानों की भूमि खरीदने के बारे में उत्तराखंड मंत्रिमंडल की मंजूरी ले ली गई है और इस बाबत जल्द ही एक प्रस्ताव तैयार कर केंद्र सरकार को उसके द्वारा तय की गई 15 दिसंबर की समय सीमा तक भेज दिया जाएगा।

पंवार ने बताया कि स्मार्ट सिटी विकसित करने के लिए केंद्र सरकार पांच साल की समयावधि में राज्य को प्रति वर्ष 100 करोड रुपये के हिसाब से कुल 500 करोड़ रुपये देगी, जबकि बाकी धनराशि की व्यवस्था राज्य सरकार को अपने संसाधनों से खुद करनी होगी।

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स्मार्ट सिटी के लिए नामित राज्य सरकार के उपक्रम मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) के उपाध्यक्ष आर. मीनाक्षी सुंदरम ने बताया कि स्मार्ट सिटी के विकास के लिए केंद्र सरकार ने कम से कम 250 एकड़ भूमि की अनिवार्यता रखी है, लेकिन देहरादून स्मार्ट सिटी के लिए न्यूनतम 1200 एकड़ भूमि का प्रस्ताव भेजा जा रहा है।

मीनाक्षी सुंदरम ने बताया कि देहरादून टी-कंपनी से 1200 एकड़ और ईस्ट होपमैन कंपनी से 700 एकड़ जमीन खरीदने के लिए अब तक चार चरणों की बात हो चुकी है और अब अंतिम चरण की बातचीत के बाद एक-दो दिन में इसके फाइनल हो जाने की उम्मीद है।

उन्होंने बताया कि राज्य मंत्रिमंडल द्वारा गठित गढ़वाल आयुक्त की अध्यक्षता और देहरादून के जिलाधिकारी तथा अन्य सदस्यों वाली एक क्रय समिति भूमि की दरों का निर्धारण तथा अन्य भूमि खरीद संबंधी मसलों पर विचार कर रही है, लेकिन एक मोटे अनुमान के अनुसार, चाय बागान की कुल 1900 एकड़ भूमि खरीदने पर 2300 करोड़ रुपये का खर्च आएगा।

मीनाक्षी सुंदरम ने बताया कि देहरादून स्मार्ट सिटी के विकास के लिए हडको ने 2200 करोड़ रुपये का त्रण देने पर सहमति दे दी है, जिसे चार दिसंबर को होने वाली उनकी बोर्ड बैठक में मंजूरी मिल जाने की उम्मीद है।

एमडीडीए के उपाध्यक्ष ने कहा कि देहरादून स्मार्ट सिटी के लिए आर्किटेक्चर और टाउन प्लानिंग में विशेषज्ञता रखने वाली चीन की तोंगजी यूनिवर्सिटी के साथ 60 और 40 के अनुपात में एक संयुक्त उपक्रम बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि तोंगजी की निवेश के साथ ही लाभ में भी 60 फीसदी की हिस्सेदारी होगी।

उन्होंने बताया कि इस संबंध में तोंगजी के साथ 11 दिसंबर को एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। मीनाक्षी सुंदरम में कहा कि देहरादून स्मार्ट सिटी की खासियत यह होगी कि यहां उच्च शिक्षा के कई संस्थान स्थापित कर इसका विकास एक नॉलेज सिटी के रूप में किया जाएगा, जबकि इसके अंदर एक बड़ा भाग चाय बागान के रूप में ही आरक्षित रहेगा।