उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ में ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान का असर दिखने अब लगा है। साल 2011 की जनगणना के अनुसार यहां हजार लड़कों के मुकाबले मात्र 920 ही लड़कियां ही पैदा हो रही थीं, जिस कारण यहां लिंगानुपात में भारी अंतर पैदा हो गया था।

इसके बाद इस जिले में बेटियों को बचाने के लिए कई अभियान चलाए गए। साल 2011 की जनगणना के मुताबिक ये जिला देश के टॉप 10 कम लिंगानुपात वाले जिलों में शामिल था।

मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. यू.एस. अधिकारी ने बताया कि पिछले तीन महीनों में यहां हजार लड़कों के मुकाबले 1032 लड़कियां पैदा हुई हैं। अधिकारी ने बताया कि लड़कियों के ज्यादा पैदा होने से पहले बिगड़ा लिंगानुपात सही होने की उम्मीद जगने लगी है।

साथ ही उन्होंने बताया कि जिले में कम लड़कियों के पैदा होने के आंकड़े आने पर प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की तरफ से अल्ट्रासांउड केन्द्रों पर सख्ती बरती गई थी, जिसका नतीजा आज सबके सामने हैं।