पी. चिदंबरम (फाइल फोटो)

उत्तराखंड की कांग्रेस सरकार अपनी आबकारी नीति के कारण अच्छी-खासी फजीहत झेल चुकी है। अब कांग्रेस के अपने ही बड़े केंद्रीय नेता भी उसके खिलाफ हो गए हैं। हरीश रावत सरकार के खिलाफ दो शराब कंपनियों की ओर से हाईकोर्ट में दायर याचिका की पैरवी खुद पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने की।

कांग्रेस कार्यकर्ताओं को जैसे ही पता चला कि पी. चिदंबरम नैनीताल आ रहे हैं तो वे उनके स्वागत के लिए पहुंच गए। लेकिन जब इस बात की जानकारी हुई कि वे राज्य की कांग्रेस सरकार के ही फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में पैरवी करने पहुंचे हैं तो कार्यकर्ता उनसे मिले बिना ही चुपचाप लौट गए। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने यहां शिष्टाचार और सहिष्णुता दिखाने की जहमत तक नहीं उठाई।

कांग्रेस कार्यकर्ताओं की असहिष्णुता तब और बढ़ गई होगी जब उनके ही वरिष्ठ केंद्रीय नेता की पैरोकारी के दम पर हाईकोर्ट ने राज्य की हरीश रावत सरकार को झटका देते हुए शराब कंपनियों को अंतरिम राहत दे दी। चिदंबरम गुरुवार को राज्य सरकार के खिलाफ निजी कंपनी यूनाईटेड स्प्रीट लिमिटेड व परनोड रिकॉर्ड इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दायर याचिका की पैरवी करने दिल्ली से हाईकोर्ट पहुंचे थे। चिदंबरम को इन कंपनियों ने हाईकोर्ट में पैरवी के लिए अपना वकील नियुक्त किया है।

कांग्रेसियों को जानकारी मिली थी कि चिदंबरम नैनीताल में बार एसोसिएशन के किसी कार्यक्रम में शामिल होने आए हैं तो वह उनसे मुलाकात करने चले गए। लेकिन हाईकोर्ट पहुंचने पर कांग्रेसियों को हकीकत पता चली तो उनकी सहिष्णुता जवाब दे गई और उनके सामने मुंह छिपाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा। नैनीताल में कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता इनते असहिष्णु निकले कि वे चिदंबरम का स्वागत किए बिना ही वहां से चुपचाप खिसक लिए।

इस मामले में चिदंबरम से मुलाकात करने आए कांग्रेसियों से संपर्क किया गया तो किसी ने भी अपना नाम उजागर करने से साफ मना कर दिया। एक कांग्रेसी नेता ने दबी जुबान से यहां तक कहा कि कंपनियों की पैरवी के लिए पार्टी के ही वरिष्ठ नेता और सुप्रीम कोर्ट के वकील पी. चिदंबरम यहां आए हैं पर उनका अपनी ही सरकार से लड़ना ठीक नहीं है।

इससे आने वाले चुनावों में राज्य सरकार को नुकसान हो सकता है। शायद यही वजह रही कि चिदंबरम हल्द्वानी से लेकर नैनीताल तक मीडिया से दूरी बनाए रहे और यहां तक कि उन्होंने सुरक्षाकर्मियों को हूटर बजाने से भी मना कर दिया। पूर्व केंद्रीय मंत्री एक होटल में रुके तो वहां भी किसी से मुलाकात नहीं कराने के निर्देश दिए गए थे।

बता दें कि राज्य सरकार ने इसी साल आबकारी नीति लागू कर मंडी परिषद को शराब बेचने का अधिकार दिया है। इसी नीति के तहत हुए समझौते को लेकर कंपनियों ने सरकार के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी।