पी. चिदंबरम (फाइल फोटो)

केंद्र की मोदी सरकार को पूर्व वित्त मंत्री, वरिष्ठ कांग्रेस नेता और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील पी. चिदंबरम का साथ मिला है। एक तरफ पूरी कांग्रेस पार्टी एनडीए सरकार की कमियां गिना रही है और दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट ने भी सरकार को झटका दिया है। ऐसे में चिदंबरम का साथ मोदी सरकार के लिए राहत भरी सांस लेकर आया है।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता चिदंबरम ने देश में जजों के चयन की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कोलेजियम सिस्टम को गलत बताया है। उन्होंने कहा कि देश की आबादी 130 करोड़ से भी ज्यादा है, फिर भी जजों की नियुक्ति में कार्यपालिका की कोई भूमिका नहीं है, जबकि कार्यपालिका के लोग सभी वर्गों से चुनकर आते हैं।

यह बात चिदंबरम ने गुरुवार को नैनीताल हाईकोर्ट के बार एसोसिएशन के सभागार में आयोजित संविधान दिवस के कार्यक्रम में कही। चिदंबरम ने कनाडा, ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि इन देशों में जजों की नियुक्ति प्रधानमंत्री की संस्तुति पर राज्यपाल की ओर से की जाती है।

कोलेजियम पर कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि कोर्ट देश की कार्यपालिका, अधिकारियों व नागरिकों पर विश्वास क्यों नहीं करता है? उन्होंने कोर्ट के इस विचार को पराकाष्ठा मानते हुए कहा कि वह न्यायाधीशों की नियुक्ति में कोर्ट के हस्तक्षेप पर सवाल नहीं उठा रहे हैं, लेकिन जजों की नियुक्ति में अधिकारियों व नागरिकों को भी चयन का अधिकार होना चाहिए।

इससे पहले हाईकोर्ट बार सभागार में पहुंचने पर पी. चिदंबरम का बार एसोसिएशन के अध्यक्ष केएस बोरा व सीआरओ एमसी पंत ने स्वागत किया।