उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के लिए टी-स्टेट की भूमि लेने के मामले में चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने साफ कहा कि सभी मजदूरों का पुनर्वास किए बिना यहां काम शुरू नहीं किया जाएगा। पहले ही इसके लिए अधिकारियों को निर्देश दिए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि वे इस मामले में किसी से लड़ाई नहीं चाहते।

गौरतलब है कि आस्थायी राजधानी देहरादून में प्रस्तावित स्मार्ट सिटी के लिए चाय बागान की जमीन अधिग्रहीत करने के सरकार के निर्णय का विपक्ष सहित कई संगठन विरोध कर रहे हैं। खासकर वहां काम करने वाले मजदूरों के भविष्य को लेकर हर कोई चिंता जता रहा है।

स्मार्ट सिटी की नोडल अधिकारी आर. मीनाक्षी सुंदरम पहले ही मजदूरों को आवास और रोजगार की गारंटी देने का दावा कर चुकी हैं। गुरुवार को मुख्यमंत्री ने भी इस मामले में चुप्पी तोड़ी। मुख्यमंत्री ने कहा कि देहरादून के लोग चाहेंगे तो स्मार्ट सिटी बनेगी और नहीं चाहेंगे तो नहीं बनेगी। लोग बताएं कि उन्हें स्मार्ट दून चाहिए या नहीं। उन्होंने कहा कि जमीन अधिग्रहण से पहले सभी विवाद शांत होने जरूरी हैं।

लोक चेतना मंच ने स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट से आम लोगों को जोड़ने और आधुनिक प्रचार तंत्र का सहारा लेने की मांग की है। उन्होंने एमडीडीए उपाध्यक्ष आर. मीनाक्षी सुंदरम को चिट्ठी भेजकर 100 फीसदी जनसहभागिता सुनिश्चित करने की मांग की है। उन्होंने अन्य संगठनों से भी सहयोग लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि इसके जरिए योजना में अधिक से अधिक लोगों को जोड़ा जा सकेगा।