उत्तराखंड की अस्थायी राजधानी देहरादून का चयन स्मार्ट सिटी के लिए चयनित 98 शहरों में हुआ है। दूसरी बड़ी चुनौती टॉप 20 में शामिल होना है और इस चुनौती से पार पाना देहरादून के लिए मुश्किल हो सकता है।

इस मुश्किल की खास वजह भी है, वह यह कि आम लोगों में जानकारी की कमी और स्मार्ट देहरादून के मामले में कम दिलचस्पी दिखाना हो सकता है। नोडल अधिकारी स्तर से केंद्र सरकार से कुछ दिन का समय जरूर मांगा गया है। ऐसा हुआ तो शहर और उत्तराखंड के लोग देहरादून का पक्ष मजबूत कर सकते हैं।

केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी स्मार्ट सिटी परियोजना के पहले चरण में देशभर से 98 शहरों को चुनाव किया गया है। दूसरे चरण में अब टॉप-20 शहरों को चिन्हित किया जाएगा। इसके लिए सभी 98 शहरों को अपना स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट (एससीपी) तैयार करना है।

यह प्रोजेक्ट शहर के अलग-अलग वर्गों के लोगों के सुझावों के अनुसार तैयार किया जाना है। इसके लिए लोगों को अपनी राय और सुझाव देने थे, जिसके लिए केंद्र सरकार ने माईगोव वेबसाइट पर लोगों से सुझाव मांगे। लेकिन अंतिम तिथि तक भी शहर के लोगों ने इसमें कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखाई। 15 नवंबर को खत्म हुई अंतिम तिथि तक केवल 65 लोगों ने ही अपनी राय दी।

केंद्र सरकार के स्तर से अतिरिक्त समय मिलने पर शहर के लोग www.mygov.in पर जाकर अपनी राय रख सकते हैं। स्मार्ट सिटी के स्टेट नोडल अधिकारी आर. मीनाक्षी सुंदरम ने केंद्र सरकार को चिट्ठी भेजकर अतिरिक्त समय देने की मांग की है। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट केंद्र सरकार को जमा करने की तिथि 15 दिसंबर है। केंद्र के स्तर से समय मिलने की पूरी संभावना है। इसके बाद देहरादून को स्मार्ट सिटी में शामिल करवाने की जिम्मेदारी अब शहर के आम लोगों के कंधों पर होगी। अभी तक स्मार्ट सिटी के बारे में दून के लोगों का रिस्पॉन्स सबसे कम रहा है।

माईगोव वेबसाइट पर राय देने के मामले में देहरादून के लोग भले ही पीछे रहे हों, लेकिन भोपाल सहित तमाम शहरों के लोगों ने इसमें खासी दिलचस्पी दिखाई है। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों के अनुसार बनारस, भोपाल, जयपुर सहित तमाम शहरों में एक-एक लाख से ज्यादा लोगों ने अपने सुझाव दिए हैं। दक्षिण भारत के लोग इस मामले में ज्यादा आगे हैं।