देहरादून के नारी निकेतन में संवासिनी के शोषण की जांच करने वाली प्रशासन की टीम को पहला सबूत तो पत्थरों में ही मिल गया था। जांच टीम मिठाई लेकर संवासिनियों से मिलने पहुंची थी, लेकिन इसके उलट कुछ संवासिनियों का व्यवहार काफी उग्र था और उन्होंने जांच टीम व मीडिया पर पथराव कर दिया। जांच टीम को यहीं समझ आ गया था कि कहीं कुछ न कुछ गड़बड़ जरूर है। इसके बाद परतें उधड़ती चली गईं।

बीस नवंबर को अपर जिलाधिकारी झरना कमठान के नेतृत्व में जांच टीम नारी निकेतन पहुंची थी। संवासिनियों का भरोसा जीतने के लिए जांच टीम अपने साथ मिठाई लेकर गई थी। टीम इससे पहले संवासिनियों से बात करती, पथराव शुरू हो गया। ऐसा लगा जैसे संवासिनियों को पहले से ही तैयार किया गया था।

मीडियाकर्मी भी परिसर से बाहर खड़े थे, उन पर अंदर से ही पथराव किया गया। मामले की जांच को भटकाने की ये एक नाकाम कोशिश थी, जो उल्टी पड़ गई। जांच टीम की मानें तो यहीं से लगा कि कुछ तो है जिसको छुपाने की कोशिश की जा रही है।

इसके बाद जांच टीम ने एक-एक पहलू की गहनता से जांच की। संवासिनियों के बयान एक-दूसरे से मैच नहीं कर रहे थे। अंदर से ही जांच टीम को कई गोपनीय बातें बताई गईं। एंट्री रजिस्टर में काट-छांट और सीसीटीवी फुटेज में संवासिनी को बाहर ले जाने की पुष्टि होने के बाद यह मामला काफी हद तक साफ हो गया था। आरोपी इसके बाद भी गुनाह कबूलने को तैयार नहीं हैं। इसलिए टीम ने आगे की जांच पुलिस से कराए जाने की संस्तुति की है।

कमठान के नेतृत्व वाली जांच समिति की रिपोर्ट में दर्ज दो महिला नर्सों के बयान ने कार्रवाई की जमीन तैयार की। एसआईटी ने उसे आधार बनाकर प्रकरण को निर्णायक मोड़ पर ला दिया है। अपर जिलाधिकारी वित्त झरना कमठान के नेतृत्व वाली टीम की रिपोर्ट में सात कर्मचारियों के बयान दर्ज हैं। इनमें से दो नर्स के बयान महत्वपूर्ण हैं।

दून अस्पताल की महिला नर्स ने बताया है कि 16 नवंबर की सुबह साढ़े छह बजे मुंह ढककर एक संवासिनी को ब्लीडिंग की शिकायत पर अस्पताल लाया गया था। उसे भर्ती की सलाह देते हुए पर्ची दी गई। इसके बावजूद संवासिनी के साथ आई महिलाएं बिना बताए उसे लेकर कहीं चली गईं और फिर लौटकर नहीं आईं। दूसरा बयान नारी निकेतन से जुड़ी महिला नर्स का है। इस बयान में कहा गया है कि संवासिनी का गर्भपात अपने आप हो गया था। केंद्र की कार्यवाहक प्रभारी के बुलावे पर ब्लीडिंग की शिकायत पर उसे देखने के लिए आई थी।

इन बयानों को ही आधार बनाकर जांच टीम ने रिपोर्ट में कहा कि जिस तरह आधा सच और आधा झूठ सामने आ रहा है, उससे लगता है कि कुछ ना कुछ गड़बड़ जरूर है। जांच टीम ने मूक-बधिर की वीडियो रिकार्डिंग के संबंध में मूक बधिर की सांकेतिक भाषा के एक्सपर्ट की राय का भी अपनी रिपोर्ट में जिक्र किया है।