नारी निकेतन मामले में जागी उत्तराखंड सरकार, फजीहत कराने के बाद एसआईटी जांच के आदेश

नारी निकेतन मामले में उत्तराखंड की हरीश रावत सरकार अब बैकफुट पर आ गई है। कुछ नहीं होने का दंभ भरने वाली सरकार को इस मामले में एसआईटी से जांच कराने का आदेश देने ही पड़े। जो काम पहले दिन होना चाहिए था, वह हफ्तेभर तक हुई फजीहत के बाद हुआ। कहना होगा कि इस मामले में अगर तुरंत कदम उठाए गए होते तो कई दिन तक चले बदनामी वाले घटनाक्रम से बचा जा सकता था।

राज्य सरकार और उसके अफसरों ने नारी निकेतन के मामले को बेहद हल्के में लिया। घटना के खुलासे के दिन ही मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सार्वजनिक तौर पर कहा कि मीडिया को ऐसे संवेदनशील मामले में किसी की बदनामी नहीं करनी चाहिए। अब मुख्यमंत्री के एसआईटी से जांच कराने के आदेश इस बात की पुष्टि करने के लिए काफी हैं कि नारी निकेतन में काफी कुछ गड़बड़ चल रहा है।

नारी निकेतन में संवासिनियों के शोषण मामले में नैनीताल से कांग्रेस विधायक और महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष सरिता आर्य ने सरकार की अच्छी खासी फजीहत कराई। अपनी ही सरकार को पाक साफ बताकर मीडिया पर ठीकरा फोड़ने वाली सरिता आर्य को सरकार की ओर से ही मंगलवार को आइना दिखा दिया गया।

विधायक ने अपने स्तर पर जांच करते लगभग ऐलान करने के अंदाज में कहा था कि नारी निकेतन में सब कुछ ठीक है। इधर, प्रशासन की जांच में मिली गड़बड़ी के बाद सरकार को एसआईटी का गठन करना पड़ा। पहले तो बिगड़ी परिस्थितियों में बगैर अनुमति नारी निकेतन में घुसने और किसी तरह की गड़बड़ी को खारिज करने के पीछे विधायक की क्या मंशा होगी, यह तो वही जाने, लेकिन एसआईटी के गठन का आदेश सरिता आर्य को आइना दिखाने जैसा ही है।