पर्यटन देवभूमि उत्तराखंड की आर्थिक रीढ़ है। यहां पर्यटन इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से लगातार कोशिशें की जा रही हैं। पर्यटन उद्योग पर राज्य सरकार सीधा फोकस कर रही है। चारधाम यात्रा में जुटी श्रद्धालुओं की भीड़ के बाद राज्य का पर्यटन विभाग भी खासा उत्साहित है।

अब पर्यटन विभाग धार्मिक महत्व के अलावा नए टूरिस्ट स्पॉट विकसित करने पर ध्यान दे रहा है। इसी कड़ी में टिहरी झील को एक नए पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है। टिहरी झील की ओर पर्यटकों को लुभाने के लिए 28-29 नवंबर को टिहरी झील साहसिक खेल महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है।

इस अवसर पर पैराग्लाइडिंग, राफ्टिंग जैसी कई साहसिक गतिविधियां और प्रतियोगिताएं आयोजित कराई जाएंगी। पर्यटन विभाग ने आयोजन को सफल बनाने के लिए करीब एक करोड़ रुपये के खर्च का खाका तैयार किया है। उम्मीद है कि टिहरी झील महोत्सव में बड़ी संख्या में पर्यटकों की भीड़ जुटेगी और सुरक्षित उत्तराखंड का संदेश देने के साथ-साथ टिहरी झील को एक नए पर्यटन स्थल के रूप में पर्यटकों के सामने पेश किया जा सकेगा।

पर्यटन विभाग इस बड़े आयोजन के मौके पर एक इनवेस्टर्स मीट भी आयोजित कर रहा है। इसमें देशी-विदेशी मेहमान शामिल होंगे। पर्यटन विभाग का लक्ष्य है कि टिहरी झील महोत्सव को पांच साल तक सरकारी मदद के जरिए आयोजित कराया जाएगा और फिर कॉमर्शियल गतिविधियां आयोजित कराई जाएंगी। पर्यटन विभाग ने केंद्रीय पर्यटन मंत्री को भी इस आयोजन में आमंत्रित किया है, जिसमें एक प्रस्ताव केंद्रीय मंत्री को सौंपा जाएगा।

भारत सरकार की स्वदेश दर्शन और प्रसाद योजना के तहत भी आर्थिक मदद का प्रस्ताव पेश किया जाएगा। राज्य सरकार कोशिश कर रही है कि साहसिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए ऋषिकेश और औली सहित राज्य के दूसरे पर्यटन स्थलों पर भी सुविधाओं का विकास किया जाए।

बहरहाल राज्य सरकार की उम्मीद पर पर्यटन विभाग अमली जामा पहनाने की हरसंभव कोशिश कर रहा है। साहसिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए भी कोशिश की जा रही है। लोगों की धार्मिक आस्था के साथ ही राज्य सरकार की एजेंसियों और पर्यटन विभाग की कोशिशों का ही नतीजा है कि मौजूदा सीजन में चारधाम यात्रा में तकरीबन दस लाख श्रद्धालुओं ने देवभूमि का रुख किया है।