नई दिल्ली।… सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केन्द्र सरकार से कहा कि उत्तराखंड में अलकनंदा और भागीरथी नदी घाटी में स्थापित की जाने वाली छह पनबिजली परियोजनाओं को मंजूरी देने संबंधी विशेषज्ञ दल की रिपोर्ट पर गौर करने के लिए गठित अंतरमंत्रालयी समिति के निष्कर्षों से उसे अवगत कराएं।

न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति उदय यू ललित की पीठ ने केन्द्र से कहा कि पर्यावरण एवं वन, जल संसाधन और ऊर्जा मंत्रालयों की समिति की रिपोर्ट पांच जनवरी तक पेश की जाए।

केन्द्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सालिसीटर जनरल पी.एस. नरसिम्हा ने कहा कि 23 नवंबर को इस समिति का गठन किया गया था, जिसे उत्तराखंड में लंबित पन बिजली परियोजनाओं के बारे में 11 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट पर गौर करना था।

विशेषज्ञ समिति ने पन बिजली परियोजनाओं के पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी प्रभाव पर अपनी रिपोर्ट तैयार की थी। पीठ ने कहा कि अतिरिक्त सालिसीटर जनरल के इस कथन के मद्देनजर मामले को आगे सुनवाई के लिए 20 जनवरी को सूचीबद्ध किया जा रहा है। केन्द्र सरकार अंतिम निर्णय के बारे में कोर्ट को अवगत कराएगी।

इससे पहले, कोर्ट ने उत्तराखंड में स्थापित होने वाली 24 पन बिजली परियोजनाओं में से 18 के बारे में विस्तृत पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी प्रभाव के बारे में रिपोर्ट देने के लिए पर्यावरण एवं वन मंत्रालय को समय दिया था।

मंत्रालय ने अपनी ऐसी ही एक रिपोर्ट में कहा था कि 24 में से छह बिजली परियोजनाओं ने काफी हद तक कानूनी अनिवार्यताओं का पालन किया है। सुनवाई के दौरान एक पक्षकार की ओर से वकील प्रशांत भूषण ने सरकार के हालिया निर्णय का विरोध किया।

पीठ ने भूषण, वकील संजय पारिख और वरिष्ठ अधिवक्ता कोलिन गोन्साल्विज से कहा कि वे अंतिम रिपोर्ट पर दो सप्ताह के भीतर अपनी आपत्तियां दाखिल करें।