नई दिल्ली।… राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने मंगलवार को उत्तराखंड में गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के लिहाज से रणनीति बनाने पर विचार-विमर्श करने के लिए गुरुवार को राज्य सरकार के अधिकारियों के साथ बैठक करने का फैसला किया।

एनजीटी अध्यक्ष स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, ‘सचिव (शहरी विकास), सचिव (जल आपूर्ति), सचिव (पर्यटन), सचिव (पर्यावरण) और संबंधित प्राधिकारों के सदस्य सचिव 26 नवंबर को अध्यक्ष के चैंबर में उपस्थित हों।’ हरित अधिकरण को सुप्रीम कोर्ट ने गंगा को प्रदूषित कर रहीं औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया था।

गंगा की सफाई के लिए याचिका दाखिल करने वाले वकील एम.सी. मेहता ने कहा कि गोमुख से हरिद्वार तक संचालित अनेक इकाइयां बिना अनापत्ति प्रमाणपत्रों (एनओसी) के काम कर रहीं हैं, जिसके बाद एनजीटी ने मंगलवार को आदेश जारी किया।

उत्तराखंड का पक्ष रख रहे वकील ने दलील का खंडन कर दिया और कहा कि राज्य सबसे कम प्रदूषण फैला रहा है और इसमें कोई होटल, आश्रम, धर्मशाला बिना एनओसी के नहीं चल रहे। पीठ ने सुनवाई के दौरान प्रदूषणकारी इकाइयों के खिलाफ राज्य सरकार की कार्रवाई के बारे में भी पूछा।

हरित अधिकरण ने कहा था कि वह कई उत्तरी और पूर्वी राज्यों से बह रही गंगा के 2500 किलोमीटर लंबे क्षेत्र में सफाई के लिए गंगा पुनरुद्धार के काम को राज्यस्तर पर ले जाना चाहता है।