कार्तिक पूर्णिमा पर इस बार नक्षत्रों का अद्भुत और सुखद संयोग होने जा रहा है। तीन नक्षत्र कार्तिक पूर्णिमा के लिए बेहद शुभ माने गए हैं। अगले दो दिनों में तीनों नक्षत्रों का स्पर्श पूर्णिमा से हो जाएगा।

प्रति एक वर्ष पूर्णिमा इन्हीं तीन नक्षत्रों में से किसी एक नक्षत्र में पड़ती है। शास्त्रीय विद्वानों के अनुसार पूर्णिमा के दिन यदि कृतिका नक्षत्र पड़ जाए तो महाकार्तिकी पर्व पड़ जाता है। यदि भरणी नक्षत्र में पूर्णिमा पड़े तो विशेष फलदायी होती है।

संयोग से यदि रोहिणी नक्षत्र पड़ जाए तो पूर्णिमा का फल कई गुना बढ़ जाता है। जो लोग पूरे मास अथवा आखिरी पांच दिन कार्तिक स्नान करते हैं उन्हें अनंत फल प्राप्त होता है। चूंकि चतुर्दशी और पूर्णिमा पर देव दीपावली भी मनाई जाती है। अत: नक्षत्रों का संयोग अनेक पुण्य फल प्रदान करता है।

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सोमवार को त्रयोदशी के आ जाने से प्रदोष का पर्व भी मनाया गया। गंगा के आ जाने पर श्रद्घालुओं ने प्रदोष व्रत रखकर भगवान शिव और विष्णु की आराधना की। मंगलवार को चतुर्दशी तिथि का प्रवेश हो जाएगा।

चतुर्दशी का पर्व वैकुंठ चतुर्दशी के रूप में मनाया जाएगा। बुधवार को भरणी और कृतिका नक्षत्र एक साथ पड़ेंगे। मंगलवार को भरणी नक्षत्र प्रात: 10:13 बजे लग जाएगा। बुधवार को कृतिका के संपन्न होते ही प्रतिपदा तिथि में रोहिणी नक्षत्र आ जाएगा।

फलस्वरूप इस बार की पूर्णिमा तिथि तीन नक्षत्रों के संयोग में पड़ने से बेहद फलदायी हो गई है। इस संयोग में गंगा स्नान और गंगा वंदन करोड़ों गुना फल प्रदान करते हैं।