जून 2013 में केदारनाथ प्राकृतिक आपदा में मध्य प्रदेश के एक किसान दम्पत्ति की दुनिया ही उजड़ गई थी। उनके दो बच्चे (बेटा-बेटी) इस आपदा के भेंट चढ़ गए थे। उत्तराखंड और मध्य प्रदेश की सरकारों ने भी उनके दुख को सहने की कामना की और मुआवजे के तौर पर कुछ धनराशि भी किसान दम्पत्ति को दी गई। लेकिन अब पता चला है कि इस दम्पत्ति ने झूठ बोला था। उन्होंने अपने बेटा-बेटी को मरा दर्शाकर उत्तराखंड और मध्यप्रदेश सरकार से मुआवजे के नाम पर सात लाख रुपये हड़प लिए थे।

हरिद्वार पुलिस ने मामले से पर्दा उठाते हुए सोमवार को मुकदमा दर्ज कर आरोपी दम्पत्ति को गिरफ्तार कर लिया। दम्पत्ति के पांच नाबालिग बच्चे भी फिलहाल पुलिस की कस्टडी में हैं। नगर पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर ने बताया कि रविवार देर रात विवाद की सूचना पर पहुंचे पुलिसकर्मी विष्णुघाट के पास गंगा किनारे रह रहे एक दम्पत्ति और उनके पांच बच्चों को नगर कोतवाली ले आए। पूछताछ में मुआवजे के नाम पर हुए खेल का पर्दाफाश हुआ।

पूछताछ में यह बात सामने आई कि मध्य प्रदेश के गांव रामनगर, भभुवा तहसील छतरपुर थाना राजनगर जिला छतरपुर निवासी रामकृपाल व उसकी पत्नी विद्या ने 2013 में केदारनाथ में 15/16 जून को आई आपदा में अपनी नाबालिग बेटी ममता एवं बेटे अजय को लापता बताते हुए हरिद्वार के मेला नियंत्रण कक्ष में सूचना दी थी।

सितंबर महीने में उसी के आधार पर रुद्रप्रयाग जिले के ऊखीमठ थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई गई। बेटा-बेटी के मृत्यु प्रमाणपत्र भी ले लिए। नवंबर महीने में राज्य सरकार ने मुआवजे के नाम पर लाखों रुपये का चेक दम्पत्ति के पते पर भेजा। यही नहीं दम्पत्ति ने मध्य प्रदेश सरकार से भी मुआवजे के नाम पर कई लाख रुपये ले लिए।

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दोनों राज्य की सरकारों से सात लाख का मुआवजा लेने की बात सामने आई है। दम्पत्ति ने ही यह योजना मिलकर बनाई थी। आपदा के दौरान दम्पत्ति हरिद्वार में ही था और पांचों बच्चे उन्हीं के ही साथ थे। बीच-बीच में भी ये परिवार यहां आता जाता रहा। अब पंद्रह दिन पहले ही दम्पत्ति अपने बच्चों के साथ यहां आकर रहने लगा था।

प्रभावी धाराओं में मुकदमा दर्ज कर दम्पत्ति को गिरफ्तार कर लिया गया है। उनके बच्चों को भी कोर्ट में पेश करने की तैयारी है। एसपी सिटी के अनुसार सहारा कंपनी को इस बाबत रिकवरी के लिए पत्र लिखा जाएगा। रविवार रात दम्पत्ति के बीच खूब विवाद हुआ। इसी दौरान किसी ने सिटी पुलिस कंट्रोल रूम में सूचना दे दी। पुलिस उन्हें कोतवाली ले आई।

कोतवाली में यह बात सामने आई कि पत्नी इस बात पर झगड़ रही थी कि पति ने अपने परिजन को कई लाख रुपये दे रखे हैं। गंगा घाट पर रह रहे दम्पत्ति पर कई लाख कहां से आए, इस सवाल पर पुलिस चौंकी। फिर पूरे मामले का परत दर परत खुलासा होता चला गया।

जानकारी के अनुसार मध्य प्रदेश की छतरपुर पुलिस को यह बात पता चल चुकी थी कि रामकृपाल ने मुआवजे का खेल किया है। तब वहां के राजनगर थाने की पुलिस ने जेल जाने का खौफ दिखाकर उससे एक लाख रुपये ले लिए। इसके बाद रामकृपाल ने सहारा कंपनी में करीब दो लाख का निवेश कर दिया और एक खाते में साठ हजार रुपये दर्ज कराए। कुछ रकम उसके सालों ने ली और एक लाख रुपये एक जमीन के मामले में डूब गए।

पांचवीं कक्षा तक पढ़े लिखे रामकृपाल के दिमाग की करामत जानकार हरिद्वार पुलिस भी हक्की बक्की रह गई। उसने दो-दो राज्य सरकारों से मुआवजा लेने के बाद कागजात में मरे अपने बेटा-बेटी का नाम बदलकर उन्हें फिर से जिंदा भी कर डाला।

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गरीब तबके से ताल्लुक रखने वाले रामकृपाल ने यह साबित कर दिखाया कि किस तरह सिस्टम को बेवकूफ बना सकते है। पेशे से दिहाड़ी मजदूर रामकृपाल साल 2013 में हरिद्वार में ही रह रहा था। उसने मेला नियंत्रण कक्ष में पहुंचकर यह बताया कि वह केदारनाथ में रहकर ही मजदूरी करता था और आपदा में उसका एक बेटा-बेटी बह गए।

फिर वह यहां से अपने बच्चों को लेकर वापस मध्य प्रदेश चला गया। स्थानीय स्तर से यह सूचना फिर डीजीपी के कार्यालय में बने कंट्रोल रूम को पहुंची। सितंबर में गुमशुदगी दर्ज हुई। पुलिस किस तरह से जांच करती है, ये भी इस केस के खुलासे से उजागर हुआ है। जिंदा बच्चों को मरा बता डाला। राज्य सरकार ने मुआवजे का चेक दे दिया।

इसके बाद भी उसका दिमाग चलना बंद नहीं हुआ। मध्य प्रदेश पहुंचकर भी उसने स्थानीय प्रशासन को अपना दुखड़ा सुनाया। उत्तराखंड में बेटा-बेटी के लापता होने के बाद लिखी गई एफआईआर की कॉपी से मुआवजा लेने का खेल खेला।

यह सब कर चुके रामकृपाल ने फिर मध्य प्रदेश से ही स्थायी निवास प्रमाण पत्र बनवाकर अपने मरे बच्चों को नाम बदलकर जिंदा कर डाला। अब आधार कार्ड भी बना लिया था। यही नहीं राशन कार्ड में भी ममता को पूजा और अजय को अमर घोषित कर दिया।

बेहद शातिर रामकृपाल भले ही कम पढ़ा लिखा है, लेकिन वह यह बखूबी जानता है कि सरकारी कागज कितने काम के होते है। उसके कब्जे से आधार कार्ड, राशन कार्ड, स्थायी निवास, मृत्यु, जाति, आय प्रमाणपत्र मिले हैं। इसके अलावा हर वह कागज मिला है, जो मुआवजा लेने में कारगार रहा है। हालांकि उसका कोई बच्चा कभी स्कूल ही नहीं गया।