राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने गंगा की सहायक नदी रामगंगा में बढ़ते प्रदूषण को लेकर सोमवार को उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकारों की आलोचना की और विभिन्न विभागों के शीर्ष अधिकारियों को तलब किया।

एनजीटी के प्रमुख स्वतंत्र कुमार ने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जल निगम के अधिकारियों को 26 नवंबर को मौजूद रहने और रामगंगा नदी से जुड़ने वाले नालों की स्थिति की जानकारी देने के लिए कहा है।

पीठ ने कहा, ‘आपको यह नहीं पता कि रामगंगा से कितने नाले जुड़े हुए हैं। विभागों के बीच कोई सहयोग नहीं है। यह दुखद है। इतने सारे विभागों की क्या जरूरत है जब वे एक-दूसरे से समन्वय नहीं कर सकते। कम से कम एक विभाग तो हो जो काम करे.. हम यहां आपके सभी अधिकारियों की मौजूदगी चाहते हैं। यह मजाक बनते जा रहा है।’

एनजीटी ने साथ ही दोनों राज्यों के राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से यह बताने को कहा कि क्या रामगंगा के तटों पर स्थित उद्योग नदी में सीधे अपशिष्ट छोड़ रहे हैं। अधिकरण ने मुरादाबाद के रहने वाले अनिल कुमार सिंघल द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह सब कहा। याचिका में कहा गया है कि मुरादाबाद में 23 और बरेली में 10 बड़े नाले रामगंगा में अशोधित सीवेज छोड़ रहे हैं।

याचिकाकर्ता की तरफ से पेश हुए वकील गौरव बंसल ने अधिकरण से कहा कि कई अखबारों की खबरों में भी रामगंगा के प्रदूषण की बात की गई है। बंसल ने कहा कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कई औद्योगिक इकाइयों को बंद करने का नोटिस जारी किया था, लेकिन उन्होंने नोटिस के खिलाफ प्रदर्शन और आंदोलन शुरू कर दिए।

रामगंगा, गंगा की प्रमुख सहायक नदियों में से है जो उत्तराखंड से निकलने के बाद उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद, बरेली, बदायूं, शाहजहांपुर और हरदोई शहरों से गुजरती है।