उत्तराखंड को अलग राज्य बने 15 साल हो गए हैं, लेकिन पहाड़ों की रानी मसूरी के पर्यटक स्थल आज भी अपने विकास की राह देख रहे हैं। शहर का भट्टा फॉल हो या मांसी फॉल आज तक इन पर्यटक स्थलों का विकास नहीं हो पाया है। पर्यटक स्थलों में पानी, बिजली, सड़क की सुविधा देने में राज्य का पर्यटन विभाग नाकाम ही रहा है।

मसूरी का भट्टा फॉल अस्थायी राजधानी देहरादून के सबसे नजदीकी पर्यटक स्थल है, लेकिन इस पर्यटक स्थल में पर्यटकों के लिए कोई सुविधा नहीं है। पर्यटकों के लिए पीने का पानी तक इस स्थान पर नहीं है। साथ ही पर्यटकों के बैठने के लिए भी कोई व्यवस्था नहीं है।

रात में घुमने वाले पर्यटकों के लिए बिजली का बल्ब तक भट्टा फॉल में नहीं है। अब अंदाजा लगा सकते हैं कि क्या ऐसे में पर्यटक इन पर्यटक स्थानों में आऐंगे। भट्टा फॉल के बाद शहर के दूसरे पर्यटक स्थल मांसी फॉल का भी यही हाल है। मांसी फॉल में सड़क, बिजली, पानी, बैठने के लिए भी कोई स्थान नहीं है, जिससे पर्यटक कुछ देर के लिए सुकून से बैठ सकें।

Bhatta-Falls-Mussoorie

मसूरी उत्तराखंड की अस्थायी राजधानी के सबसे नजदीकी खूबसूरत पर्यटक स्थल है, लेकिन लगता है मसूरी के पर्यटक स्थलों की देखरेख पर्यटन विभाग भूल गया है। फाइलों में बड़ी-बड़ी योजनाएं पर्यटन विभाग ने बनाई हैं, लेकिन आज तक धरातल पर कोई योजना नही उतर पाई है।

पहाड़ों की रानी में हर साल करीब बीस लाख से अधिक पर्यटक घूमने आता हैं, लेकिन पर्यटक शहर की माल रोड, कंपनी गार्डन, हाथी पांव तक सीमित रह गए हैं। जिससे पर्यटक एक दिन घूमकर दूसरे दिन मसूरी से वापस चले जाते हैं। पर्यटकों के रुकने के लिए कोई अन्य पर्यटक स्थल आज तक विकसित नहीं हो पाया है।

वहीं कैंपटी फॉल की बात की जाए तो कैंपटी में पर्यटकों के लिए रहने खाने, पीने का साफ पानी, बैठने के लिए स्थान बनाए गए तो मसूरी में आने वाले अधिकत्तर पर्यटक अब कैंपटी जा रहे हैं। अगर मसूरी के भट्टा फॉल और मांसी फॉल को विकसित किया जाए तो कैंपटी फॉल जाने वाले पर्यटक मसूरी में रुक कर भट्टा फॉल और मांसी फॉल को देखने जा सकते हैं।